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ढाई माह बाद खुले धर्मस्थलों के कपाट, पूजा अर्चना और इबादत

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रायबरेली। करीब ढाई माह बाद सोमवार को धार्मिक स्थलों के कपाट खुल गए। मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्च और मस्जिदों में पूजा-अर्चना के साथ इबादत हुई। सभी समाज के लोगों ने देश को कोरोना मुक्त होने की दुआएं मांगी। इस दौरान सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया गया।
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एक समय में पांच लोगों ने ही पूजा-अर्चना और इबादत की। शहर के साथ ही देहात क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों-मस्जिदों और गुरुद्वारों, चर्च में लंबे समय बाद आस्था की झलक देखने को मिली।
पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई का कहना है कि सभी समाज के धर्मगुरुओं के साथ बैठक करके सरकार की गाडलाइन के तहत पूजा-अर्चना और इबादत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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रेलवे स्टेशन रोड स्थित मंसा देवी मंदिर में दूर-दराज तक के भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। लंबे समय बाद मंदिर के कपाट खुले तो आस्था की झलक फिर देखने को मिली। सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए लोगों ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
शहर के चंदापुर कोठी स्थित शिव मंदिर, डिग्री कॉलेज चौराहा स्थित पहलवान वीर बाबा मंदिर, कैनाल रोड स्थित हनुमान मंदिर, जहानाबाद चौकी स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के भी कपाट खुले। भक्तों ने बारी-बारी से पूजा की।
गुरुनानक नगर स्थित गुरुद्वारा में बहुत दिनों बाद चहल-पहल दिख रही थी। गुरुद्वारे में पूजा पाठ के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। गुरुद्वारे के अंदर जाने से पहले वहां पर मौजूद कार्यकर्ता भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग कर रहे थे।
एक बार में पांच लोगों को गुरुद्वारे में पूजा पाठ के लिए इंट्री मिली। बहुत दिनों के बाद पूजा-पाठ की अनुभूत की खुशी भक्तों के चेहरे पर साफ दिखी। गोरा बाजार के निकट स्थित चर्च में सुबह के वक्त सन्नाटा दिखा, लेकिन शाम के वक्त प्रार्थना सभाएं हुई।
चर्च की साफ-सफाई का कार्य जरूर कराया गया। बस स्टेशन स्थित चर्च में भी साफ-सफाई कराई गई। शाम के वक्त समाज के लोगों ने चर्च पहुंचकर प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया।
कैनाल रोड स्थित मस्जिद समेत जिलेभर की मस्जिदों में काफी समय बाद नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे। हालांकि सरकार की ओर से जारी गाडलाइन का पालन करते हुए एक समय में पांच लोग ही नमाज पढ़ सके।
मस्जिदों में साफ-सफाई के साथ ही सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए। मुस्लिम समाज के जावेद अहमद, मो.अतीक, मुशीर का कहना है कि सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुुए इबादत की गई।
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