गदागंज (रायबरेली)। थाना क्षेत्र में वातावरण को प्रदूषित करने वाली कोयले की भट्ठियों पर बुलडोजर चलाया गया। इनमें कई ऐसी भट्ठियां थीं, जिनकी वन विभाग से परमीशन थी, लेकिन कई सालों से लाइसेंस रिनीवल नहीं करवाया गया।
वन विभाग और स्थानीय पुलिस की मदद से कोयले की 20 भट्ठियां तोड़ी गईं। आबोहवा को प्रदूषित करने वाली ये भट्ठियां कई सालों संचालित थीं।
धूता, कजियाना, गढी मनिहार, पूरे गड़रियन, सुदामापुर आदि गांवों में कोयले की 20 भट्ठियां तोड़ी गईं। इस दौरान वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एके सिंह, रेंजर हरिओम श्रीवास्तव, वन दरोगा रजनीश कुमार, राकेश कुमार और थाना प्रभारी अरविंद सिंह पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे।
वन कर्मियों ने बताया कि कजियाना एवं धूता में चल रही विजय अवस्थी की तीन भट्ठियां, आले हसन की दो, कल्लू की दो, लंबरदार की दो, राम सुमेर सिंह की तीन, राजेश सिंह, धनराज की एक-एक, मनोज बाजपेयी, मोनू की एक-एक, रिंकू सिंह की दो, बबलू और मुन्ना की एक-एक भट्ठी तोड़ी गई।
अनजान बना रहा वन विभाग
गदागंज। क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित कोयले की भट्ठियां कई सालों से संचालित हो रही थीं। इसके बावजूद वन विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भट्ठियों का संचालन वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से हो रहा था। इसके लिए हर महीने जेब गर्म होती थी। यही वजह है कि अभी तक इस कोयले के व्यापार में कोई अड़चन नहीं आ रही थी। शासन और प्रशासन के सख्त होने पर वन विभाग ने भी सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।