रायबरेली। सदर तहसील और कलेक्ट्रेट में जमीन हथियाने के लिए कैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते हैं, इसका खुलासा विवेचक अरुण कुमार अवस्थी की जांच में हुआ है। जांच में पाया गया है कि 2009 में बनाई गई जमीन की खतौनी फर्जी थी।
वह खतौनी रिकॉर्ड रूम से जारी ही नहीं की गई थी। यही नहीं जहां पर बंजर खाता दर्ज था, वहां पर सरजूदेई का नाम दर्ज कर दिया गया था। विवेचक की जांच में यह खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। यही नहीं जांच के दौरान रिकार्ड रूम से कई अभिलेख भी नहीं पाए गए हैं। कहा जा रहा है कि इसी माह इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा बंजर जमीन में फर्जी वाड़ा किया गया था। मामले में तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व व संप्रति प्रशासनिक अधिकारी मंजूलता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसील कर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल, पूवी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना सदर कोतवाली में तैनात निरीक्षक अरुण कुमार अवस्थी कर रहे हैं। विवेचक का कहना है कि रिकार्ड रूम से कई दस्तावेज मुहैया करा दिए गए हैं। कुछ दस्तावेज शेष हैं। उन्हें भी जल्द मांगा गया है। वर्ष 2009 में जमीन से जुड़ी जो खतौनी जारी की गई थी, वह फर्जी थी।
खतौनी रिकॉर्ड से जारी नहीं की गई थी, बल्कि उसे आरोपियों ने खुद बनाई थी। बंजर खाता में मृतक सरजूदेई का नाम दर्ज कर दिया गया था। इसी सप्ताह विवेचना पूरी हो जाएगी और फिर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। विवेचक का कहना है कि जमीन से जुड़े हुुए फर्जीवाड़ा में आरोपियों को जेल जाना ही पड़ेगा।
लखनऊ तक पहुंच गया हाईवे की जमीन का मामला
शहर के त्रिपुला चौराहा स्थित रायबरेली सलोन कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दर्ज जमीन का मामला गरमा गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम पूरे प्रकरण की जांच करा रहे हैं।
जमीन के पट्टे की जांच भी शुरू करा दी गई है। प्रापर्टी डीलरों ने जमीन हथियाने की साजिश रची थी। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज संचालक चंद्रशेखर रस्तोगी को खूब पैसा देने का वादा किया और फिर जमीन हथियाने का खेल शुरू हुआ।
अमर उजाला के खुलासे के बाद इस पर रोक लग गई और अब जांच शुरू हो गई। खास बात ये है कि जमीन से जुड़ा यह मामला अब लखनऊ तक पहुंच गया है। राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि लखनऊ तक मामला पहुंच गया। जल्द इस प्रकरण की जांच करने के लिए कमिश्नर यहां आ सकते हैं।
कहा जा रहा है कि कोल्ड स्टोरेज की जमीन हथियाने का प्रयास करने वाले बिल्डर डिडौली, देवानंदपुर समेत अन्य शहर के कई स्थानों पर मनमाने तरीके से जमीन की प्लाटिंग कराने का काम कर रहे हैं। जानकर भी अधिकारी इस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
तो क्या मोहिद्दीनपुर में हटे दीपेंद्र
शहर से सटे मोहिद्दीनपुर गांव की एक जमीन में किए गए फर्जीवाड़ा का मामला तूल पकड़ रहा है। कहा जा रहा है कि जमीन वरासत के नाम पर बड़ा खेल किया गया। दो अधिकारियों ने जमीन में अलग-अलग आर्डर कर दिया। इस मामले में सदर तहसील से हटाए गए वरिष्ठ सहायक दीपेंद्र प्रताप सिंह की भी भूमिका रही। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि मोहद्दीनपुर का मामला डीएम तक पहुंचा तो वह अवाक रह गए। इसी मामले में सदर तहसील के वरिष्ठ सहायक का तबादला रातोंरात बीते दिन सलोन कर दिया गया।