रायबरेली। शासन और सरकार ने दिवाली से पहले बिजली की लाइनों की अच्छी तरह जांच करने के आदेश दिए थे, जिससे त्योहार पर उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिल सके। इसके बावजूद अफसरों ने इस आदेश को ताक पर रखा। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। शहर में जहां दिवाली वाले दिन कटौती के साथ ट्रिपिंंग से लोगों को जूझना पड़ा, वहीं सरेनी में डलमऊ ट्रांसमिशन से निकले मल्केगांव फीडर में कई स्थानों पर फॉल्ट आ गई। इससे इलाके के 35 गांवों में बिजली गुल है। प्रकाश पर्व पर बिजली संकट से उपभोक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश है।
डलमऊ स्थित 132 केवी पावर हाउस से सरेनी ब्लॉक के मल्के गांव विद्युत उपकेंद्र को बिजली आपूर्ति जाती है। बुधवार रात करीब 12 बजे लालगंज और मल्केगांव के बीच मल्केगांव फीडर में कई स्थानों पर इंसुलेटर पंचर हो गया, जिससे उपकेंद्र की आपूर्ति ठप हो गई। लाइनों में फॉल्ट की सूचना से अफसरों में हड़कंप मच गया। इस उपकेंद्र से ब्लॉक क्षेत्र के करीब 35 गांवों को बिजली उपलब्ध कराई जाती है। करीब 6500 घरेलू उपभोक्ता हैं। इन लोगों को दिवाली पर भी बिजली नहीं मिली। शहर में दिवाली होने के बावजूद पूर्वाह्न 10 से 12 बजे तक कटौती की गई। नागरिकों का कहना है कि कम से कम त्योहार पर तो 24 घंटे बिजली देनी चाहिए। ट्रिपिंग से लोग परेशान ही रहे। खास बात यह है कि दिवाली को लेकर प्रदेश सरकार और शासन ने काफी सक्रियता बरती। इसके बावजूद जिले के अफसरों ने इस आदेश का पालन करना उचित नहीं समझा। सरेनी के त्रिवेदी का पुरवा निवासी शैलेश त्रिवेदी और मूसापुर निवासी राजेश त्रिवेदी का कहना है कि विभागीय अफसरों की लापरवाही से ऐसा हुआ है। शासन के सख्त निर्देश के बाद भी पेट्रोलिंग नहीं कराई गई। इसका खामियाजा हजारों उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। गेंगासों निवासी अंकित कुमार और बेनीमाधवगंज निवासी रामेंद्र का कहना है कि बिजली न मिलने से घरों में लगी झालरें शोपीस बनी हैं।