रायबरेली। गांवों में अब मनरेगा से लोगों को व्यक्तिगत लाभ देने की तैयारी है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। जिले में मनरेगा से 1392 शोकपिट और 467 कैटिल शेड बनाए जाएंगे।
इसके अलावा 841 कंपोस्ट खाद के गड्ढे के साथ 826 किसानों के खेतों के समतलीकरण का प्रस्ताव है। हालांकि काम शुरू होना था, लेकिन बारिश होने के कारण गांवों में काम प्रभावित हो गया है। शनिवार को करीब आठ सौ गांवों में मनरेगा के काम ठप रहे। जल्द ही गांवों में व्यक्तिगत कार्यों को कराने का काम शुरू होगा।
मनरेगा में गरीबों को गांव स्तर पर ही रोजगार देने की मंशा है। श्रमिकों के पलायन को रोकने के साथ ही सौ सौ दिन रोजगार दिया जा रहा है। अब मनरेगा से लोगों को व्यक्तिगत लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
पूर्व में भी लोगों को व्यक्तिगत लाभ दिया जा रहा है, लेकिन अब काफी संख्या में लोगों को लाभान्वित किए जाने का प्रस्ताव है। जिले में बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए गांवों में 1392 शोकपिट बनाने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा खाद उत्पादन के लिए 841 स्थलों पर कंपोस्ट खाद के गड्ढे बनाए जाएंगे। आवारा पशुओं को आश्रय देने के लिए 467 कैटिल शेड बनाए जाएंगे। 826 गरीब किसानों के खेतों का समतलीकरण का प्रस्ताव है। अब तक 131 किसानों के खेतों के समतलीकरण का काम पूरा हो चुका है।
538 तालाबों का मनरेगा से होगा कायाकल्प
जिले के 538 तालाबों के कायाकल्प की तैयारी है। इसके लिए सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसमे 10 तालाबों का काम भी पूरा हो चुका है। शेष तालाबों का काम दो महीने में पूरा कराने के आदेश दिए गए हैं। अब तक 988 ग्राम पंचायतों में 641 महिला मेटों की तैनाती हो चुकी है। इसमें 64 मेट ने काम शुरू कर दिया है।
मनरेगा से गरीबों को व्यक्तिगत लाभ देने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जल्द ही कैटिल शेड, खेत समतलीकरण, शोकपिट, कंपोस्ट खाद पिट के साथ ही तालाबों के सौंदर्यीकरण का काम शुरू होगा।
- जीपी कुशवाहा, उपायुक्त (मनरेगा)