प्रशासनिक अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन वापस लेने की मांग पर सरकार के खिलाफ लखनऊ में कैंडल मार्च निकाला गया।
लेकिन प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास के दो किमी करीब भी फटने का मौका नहीं दिया। इस दौरान तीखी झड़प हुई और पुलिस को बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को रोकना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एक ओर सरकार ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को निलंबित कर रही तो दूसरी ओर उनके समर्थन में शांतिपूर्ण मार्च निकालने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।
मार्च वैसे तो सामाजिक संगठनों की ओर से निकाला जा रहा था, लेकिन इसमें भाजपा और शिवसेना की इकाइयां भी शामिल हो गईं, जिससे बाकी संगठन बचते नजर आए। कैंडल मार्च जनवादी संगठनों और ट्रेड यूनियनों के बैनर तले विधानसभा से शुरू हुआ।
इसमें अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, जनवादी लेखक संघ, एसएफआई, किसान सभा, यूपी बैंक एंप्लॉइज यूनियन, गोमतीनगर रेजीडेंट वेलफेयर, डीएफआई और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।
यहां से हजरतगंज चौराहा स्थिति गांधी प्रतिमा पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी जमा हो गए। बीच में भाजपा कार्यालय से कैंडल मार्च निकाल रहे पार्टी कार्यकर्ता भी मार्च का हिस्सा हो लिए।
यहां से राजभवन होते हुए मुख्यमंत्री आवास पहुंचने की बात चली और सभी सड़क पर आए गए। प्रदर्शनकारियों के इस रुख से पुलिस हक्की-बक्की रह गई क्योंकि पहले सूचना थी कि कैंडल मार्च हजरतगंज चौराहे पर समाप्त हो जाएगा।
हजरतगंज चौराहे पर यह समाप्त हुआ भी लेकिन इससे पहले पुलिस से काफी देर तीखी झड़पों और जोर आजमाइश का दौर चला।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सीएम के आवास के सामने जाकर कैंडल मार्च पूरा किया जाएगा, ताकि उन्हें उनके गलत फैसले का भान कराया जा सके, लेकिन पुलिस अधिकारी इसके लिए राजी नहीं हुए।
प्रदर्शनकारियों में अधिकतर महिलाएं थी, जिन्हें रोकने के लिए महिला पुलिस सामने खड़ी कर दी गई। लेकिन करीब डेढ़ सौ लोगों की भीड़ जमा होने के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए और फोर्स तैनात कर दी। प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके तो वे सड़क पर ही बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एक तरफ प्रदेश सरकार राजा भैया को क्लीन चिट दिलवा देती है तो दूसरी तरफ एक ईमानदार ऑफिसर को अपना काम पूरा करने पर निलंबित कर दिया जाता है।
इस बीच भाजपा और शिव सेना की इकाइयों के नेताओं को प्रदर्शन की अगुवाई में आते देख इसमें शामिल थियेटर आर्टिस्ट, ट्रेड यूनियन लीडर, लेखक समुदाय, महिला संगठन आदि पीछे हटने लगे और धरना खत्म हुआ।
हालांकि इस दौरान संगठनों द्वारा चेतावनी दी गई कि अगर सरकार ने दुर्गा शक्ति का निलंबन वापस नहीं लिया तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
आप ने राज्यपाल को ज्ञापन भिजवाया
निलंबन के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने भी आवाज उठाई है। उन्होंने दुर्गा शक्ति की बहाली के लिए राज्यपाल को ज्ञापन भिजवाया है।