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जिया उल हत्याकांड : सन्नाटे के बीच बलीपुर में हर ओर खौफ, खुलकर बोलने से बचते रहे लोग

Sun, 06 Oct 2024 06:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हें यादव, उसके भाई सुरेश और कुंडा सीओ जिया उल हक की हत्याकांड से प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। तिहरे हत्याकांड की गूंज सदन में गूंजा। घटना को लेकर देश की सियासत भी गरमाई।
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कुंडा के बलीपुर में सीओ हत्याकांड में दोषी जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले की बिलखती पत्नी व बच्चे। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कुंडा के सीओ रहे जिया उल हक हत्याकांड को लेकर आए फैसले से सन्नाटे के बीच बलीपुर में हर ओर अंजाना खौफ दिखा। कोई भी खुलकर बोलने से बचता रहा। आरोपियों के घर का पता बताने से भी लोग बचते रहे। हालांकि चौराहे से लेकर गांव में एक जगह जमा लोग आपस में खुसर फुसर करते रहे। घटना के सिलसिले में पूछने पर चुप्पी साध लेते।

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जनपद के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हें यादव, उसके भाई सुरेश और कुंडा सीओ जिया उल हक की हत्याकांड से प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। तिहरे हत्याकांड की गूंज सदन में गूंजा। घटना को लेकर देश की सियासत भी गरमाई। घटना के बाद करीब दो साल तक बलीपुर में पीएसी कैंप करती रही। धीरे-धीरे माहौल बदलने लगा। सीओ व प्रधान हत्याकांड के आरोपी जेल से जमानत पर छूटकर घर भी पहुंचे।

शुक्रवार को सीबीआई कोटे का फैसला आते ही बलीपुर फिर अचानक सुर्खियों में आ गया। लोगों के जेहन में 11 साल पहले हुई घटना की याद ताजा हो गई। शनिवार को बलीपुर चौराहे से लेकर पूरे गांव में हलचल तेज थी। सन्नाटे के बीच हर कोई खौफजदा नजर आया। सीओ व प्रधान की हत्या पर लोग खुलकर बोलने से बचते रहे। चौराहे पर चाय की दुकान पर बैठे लोग घटना आपस में 10 लोगों को दोषी ठहराए जाने के मामले को लेकर खुसर फुसर भी करते रहे। बाहरी लोगों के पहुंचने पर वे खामोश हो जाते। ग्रामीण अंजान खौफ से भयभीत नजर आए।

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जिले में हर जुबां पर रहा फैसले का जिक्र

सीओ हत्याकांड को लेकर आए फैसले का जिक्र पूरे जिले में होता रहा। कोई घटना के आरोपी बनाए गए कुछ लोगों को निर्दोष बताते रहे। कुछ अदालत के फैसले को सही ठहराते नजर आए। हर जुबां पर सीओ जिया उल हक हत्याकांड का फैसला रहा। अब लोगों की निगाहें दोषियों को मिलने वाली सजा पर टिकी हैं। दस आरोपियों को क्या सजा मिलती है। परिवार के लोगों को भी सजा सुनाए जाने का इंतजार है। 

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