सर मुझे मालूम होता कि मनीष ऐसा कदम उठा लेगा तो वह बहन के पास प्रयागराज न जाती। यह कहते हुए पत्नी सुधा रोती बिलखती रही। परिवार के लोगों संग परवरिश करने वाली बहन उसे संभालती रही। पत्नी के बयान और पूछताछ के बाद बुधवार को सिपाही मनीष ने आत्महत्या क्यों की, गुत्थी उलझी रही।
आजमगढ़ में मेहनगर के देवकली निवासी मनीष गौतम (28) नगर कोतवाली के पृथ्वीगंज पुलिस चौकी पर तैनात था। पिता समेत परिवार के अन्य सदस्य दिल्ली में रहते हैं। मंगलवार को उसने चौकी से कुछ दूरी पर किराए के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी।
लोगों का कहना था कि उसने अपने हाथ की नस काटने की कोशिश भी की थी, जबकि पुलिस अधिकारी और उसके साथी, इस पर चुप्पी साधे हैं। बताते हैं कि किसी असहनीय दर्द के बाद उसने फांसी लगाकर जान देने का आत्मघाती कदम उठाया। आधी रात के बाद पत्नी मधु व बुआ का बेटा पवन अन्य लोगों के साथ पहुंचे।
पुलिस अफसरों से बातचीत के दौरान मधु रोते हुए बोल पड़ीं, सर, मालूम होता कि मनीष ऐसा कदम उठा लेगा तो वह घर न जाती। 11 माह की बेटी की परवरिश कौन करेगा। परिवार के अन्य सदस्य भी हैरान है कि आखिर मनीष ने यह कदम क्यों उठाया। किसी से तनाव के बारे में कभी चर्चा तक नहीं की।
घटना के दूसरे दिन बुघवार को भी खुदकुशी की गुत्थी पुलिस सुलझा नहीं सकी। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पर पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल, एएसपी पूर्वी विद्या सागर मिश्रा, एएसपी पश्चिमी रोहित मिश्रा ने सिपाही के शव को कंधा देकर परिजनों के हवाले किया। परिजन शव लेकर आजमगढ़ रवाना हो गए।
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बहन के घर से आजमगढ़ चली गई थी मधु
मृत सिपाही मनीष के साथ उसकी पत्नी भी किराए के मकान में रहती थी। दस दिन पहले मधु अपनी सिपाही बहन से मिलने प्रयागराज गई। वहां से आजमगढ़ चली गई थी।
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घटनाओं के बाद मनीष रहता था तनाव में
सहकर्मियों के मुताबिक क्षेत्र में यदि कोई संगीन वारदात हो जाती थी तो मनीष तनाव में आ जाता था। दीपक की हत्या के बाद वह भीतर ही भीतर तनाव में रहता लेकिन किसी से चर्चा नहीं करता। सहकर्मी सिपाहियों के अनुसार वह हर घटना के लिए खुद को जिम्मेदार मान लेता था। इसके चलते वे लोग उसके अकेला नहीं छोड़ते थे। फिलहाल उसके खुदकुशी से साथी पुलिसकर्मी भी हैरत में हैं।