दूसरे प्रयास में मिली है सफलता
दिल्ली में रहकर पढ़ाई करने वाले चैतन्य को दूसरे ही प्रयास में यह सफलता मिली है। चैतन्य के पिता सुधांशु कामर्शियल पायलट की नौकरी छोड़कर मेडिकल कॉलेज के बच्चों को अंग्रेजी बोलना सिखाते थे। मां रेनू मिश्रा एक गृहणी की तरह अपने दोनों बेटों की परवरिश करती थी। दो भाइयों में चैतन्य छोटा है । बड़ा भाई अंकुर मिश्र हरिव्दार में योगा विषय से पीएचडी कर रहा है। चैतन्य शुरू से ही होनहार छात्र था वह शुरू से ही स्कॉलरशिप होल्डर था।
चैतन्य अपनी पढ़ाई स्कॉलरशिप से मिले पैसे से करता था। चैतन्य के यूपीएससी परीक्षा में चयन होने की सूचना जब गहरी चक गांव पहुंची तो चैतन्य के स्वजन और ग्रामीण खुशी से झूम उठे। लोगों ने एक दूसरे को लड्डू खिलाकर खुशियां बांटी। इस मौके पर कृष्णकांत मिश्रा,बीडी मिश्रा,मुन्ना मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश त्रिपाठी, विनोद मिश्रा, अखिलेश त्रिपाठी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
निष्ठा और लगन से किया गया कोई कार्य नहीं होता है बेकार
आईएएस की परीक्षा में चयनित चैतन्य मिश्र ने यह साबित कर दिया है कि निष्ठा और लगन से किया गया कोई भी कार्य बेकार नहीं होता है। परिवार में कोई आईएएस नहीं था, मगर चैतन्य ने यह संकल्प लिया कि वह देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास करके माता-पिता का नाम रोशन करेगा। चैतन्य की मानें तो हाईस्कूल के बाद कभी भी माता-पिता के पैसे से पढ़ाई नहीं किया, बल्कि वजीफा ने उनकी राह आसान कर दी। 397 वीें रैक मिलने से वह संतुष्ट नहीं है,उन्होंने बताया कि वह आईएएस की 2022 में होने वाली परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में इन दिनों दिल्ली में हैं।
दो भाइयों में सबसे छोटा चैतन्य मिश्र ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि किसी भी कार्य के लिए निष्ठा और समर्पण आवश्यक है। जब तक किसी कार्य को दिल लगाकर नहीं किया जाएगा , तब तक अपेक्षित सफलता मिलने वाली नहीं है। पिता कामर्शियल पायलट की नौकरी छोड़कर बच्चों को कोचिंग पढ़ाते थे। इससे शहर में रहकर इतना बड़ा खर्च चलाना संभव नहीं था।
वजीफे की रकम से की पढ़ाई
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में कालेज में टॉप करने वाले चैतन्य ने इंजीनियरिंग की पढाई में टापर बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। पढ़ाई तेज होने के कारण शिक्षकों के नजदीक रहना और पढाई में आने वाली कठिनाई के लिए सहयोग लेना उसकी आदत बन गई थी। संस्थान से इतना वजीफा मिल जाता था कि उससे साल भर की पढ़ाई पूरी हो जाती थी। वर्तमान में दिल्ली में रहकर पढाई करने वाले चैतन्य ने दूरभाष पर बताया कि गांव का परिवेश बहुत अचछा है, मगर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिहाज से ठीक नहीं है। गांव में रहने वाले बच्चों को उचित प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है। इससे उनका सम्यक विकास नहीं हो पाता है।
उन्होंने बताया कि वह गहरीचक में स्थित मिडिल स्कूल में कुछ दिनों पढ़ाई की थी। फिर वह माता-पिता के साथ लखनऊ में रहने लगा। चैतन्य अपनी सफलता से खुश है, मगर आईएएस की परीक्षा में मिली रैंक से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि आईएएस के वर्ष 2022 की परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं।