प्रतापगढ़ में कौहंडौर थाना के सामने मकान में लगी आग के बाद जले सामान।
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कटर मशीन की चिंगारी से लगी थी आग
प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर कोहड़ौर थाने से कुछ दूरी पर आतिशबाज अशफाक का तीन मंजिला मकान है। मकान में वह परिवार सहित रहने के साथ ही पटाखों का कारोबार भी करता है। शनिवार को मकान के दूसरे तल पर बने किचन में टाइल्स लगाने का काम चल रहा था। लाखीपुर निवासी किशोरीलाल पटवा का बेटा संदीप पटवा (23) अपने जीजा राजेश पटवा (30) निवासी काला कुश्ती जिला फतेहपुर के साथ शनिवार की रात टाइल्स लगा रहा था।
रात करीब साढ़े आठ बजे टाइल्स काटने के दौरान निकली चिंगारी से गैस सिलिंडर में आग लग गई। सिलिंडर फटने से मकान की छत और दीवार उड़ गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। किचन में काम कर रहा संदीप व अशफाक का बेटा शकील (30) कमरे में आग की आगोश में समा गए। वे बाहर निकल नहीं सके। देखते ही देखते आग दूसरे कमरों में रखे पटाखों तक पहुंच गई। जिसके बाद तेज आवाज के साथ विस्फोट होने लगे। लोग जान बचाकर भाग निकले। दूर से लोग शोर मचाते रहे।
दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पाया गया काबू
सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की दो टीमें पहुंचीं और आग बुझाने लगीं। करीब दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग की चपेट में आकर झुलसे अशफाक के बेटे सगीर (42), सगीर की बेटी सजिया (18), अशफाक की बहू रानी (28), अशफाक की पत्नी शहनाज बेगम (55) व राजेश कुमार (30) को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। यहां सजिया, सगीर और राजेश पटवा की हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने प्रयागराज रेफर कर दिया गया। जबकि रानी व शहनाज बेगम को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
आग बुझने के बाद धुआं छंटने पर फायरब्रिगेड के कर्मचारी बगल के मकान के सहारे अशफाक के घर में घुसे। इस दौरान कमरे में मजदूर संदीप व शकील की जली हुई लाशें मिलीं। शव बुरी तरह जल गए थे। इससे पहचान नहीं हो पा रही थी। शवों को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रात करीब साढ़े बारह बजे दोनों की शिनाख्त हो सकी। इस मामले में किशोरीलाल की तहरीर पर पुलिस ने आतिशबाज अशफाक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
पोस्टमार्टम के बाद शकील का शव लेकर परिजन घर पहुंचे। कुछ देर बाद उसके जनाजे को वाजिदपुर गांव स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया। वहीं, दूसरी ओर संदीप के शव को परिजनों ने चिलबिला में सई नदी के तट पर दफना दिया। अपर जिलाधिकारी मुकेशचंद्र ने बताया कि प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम पट्टी व सीओ सिटी को जिम्मेदारी दी गई है। जांच में दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। घर की वीडियोग्राफी कराई गई है। जले हुए सामानों के अवशेषों को फायरबिग्रेड ने कब्जे में ले लिया है।
नवरात्र व रमजान की खुशियां मातम में बदलीं
कोहड़ौर नगर पंचायत में आतिशबाज अशफाक के घर में शनिवार की रात टाइल्स कटिंग मशीन से उठी चिंगारी ने ऐसा कहर बरपाया कि नवरात्र व रमजान माह की खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। कोहड़ौर से लाखीपुर तक लोगों के रोने-बिलखने की आवाज से मातम पसरा हुआ था। हादसे के चलते कोहड़ौर कस्बे में भी हर कोई गमजदा नजर आया।
तेज विस्फोट से दहल उठा कोहड़ौर बाजार
प्रयागराज-अयोध्या राजमार्ग पर स्थित कोहड़ौर बाजार में आतिशबाज अशफाक के मकान में लगी आग से बाजार में हड़कंप मच गया। लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। रुक-रुक हो रहे विस्फोट के चलते कोई भी अपनी जान खतरे में नहीं डालना चाहता था। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने पड़ोस के दो और आतिशबाजो के घरों की खिड़की व दरवाजों को तोड़कर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। विस्फोट के चलते पड़ोसियों के मकान की छतें व खिड़कियां व दरवाजे दरक गए थे। रविवार की सुबह हर कोई अपने मकान के नुकसान का आकलन करता दिखा।
लाकेट से संदीप तो कपड़ों से हुई शकील की शिनाख्त
आतिशबाज असफाक के घर लगी आग व विस्फोट में संदीप व शकील की जली हुई लाशें मिली थी। जिसे पहचान पाना आसान नहीं था। काफी मशक्कत के बाद संदीप के गले की लाकेट से और शकील की कपड़े से पहचान हो सकी। दोनों किचन के कमरे में मौजूद थे। घटना के बाद हुए विस्फोट में वे बाहर निकल नहीं सके थे।
रात में आतिशबाजों के घर से हटाए गए पटाखे
आतिशबाज अशफाक के घर में लगी आग बुझाने के बाद नुकसान का आकलन किया जाने लगा। तभी पता चला कि संदीप व शकील गायब हैं। दोनों के किचन में होने का अनुमान लगाने के बाद फायरब्रिगेड कर्मी खोजबीन करने लगे। इधर, आतिशबाज अशफाक समेत दूसरे लोग अपने मकानों में रखे पटाखे पीछे के रास्ते हटाने में जुटे रहे। मैजिक डाला से भारी मात्रा में पटाखे दूसरे स्थानों पर भेजे गए। बाजार में इस बात की चर्चा है कि रिहायशी मकान में लोग पटाखे बनाते व बेचते थे। जबकि उन्हें दुकान में केवल सैंपल रखने की ही अनुमति थी। सहालग को देखते हुए बड़ी मात्रा में पटाखे मकानों में जमा किए गए थे।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, 13 लोगों की जा चुकी है जान
जिले में आतिशबाजों के मकानों में पहले भी पटाखों में आग लगने से विस्फोट के चलते हादसे हो चुके हैं। जेठवारा, कटरागुलाब सिंह, कटरामेदनीगंज, बड़नपुर, बेगमवार्ड समेत अन्य स्थानों पर आतिशबाजों के मकानों में आग लगने के बाद 13 लोगों की जान जा चुकी है। इन हादसों के बाद भी लोगों को न तो कानून का भय रहा और न ही अपनी जान की परवाह। घरों में मौत का सामान सजाकर रखना इनकी आदत में शुमार हो गया था। खुद की जान खतरे में डालने वाले आतिशबाज पड़ोसियों की जिंदगी भी खतरे में डालने से बाज नहीं आते।