This time affidavit will have to be given on the stamp of fifty rupees instead of ten
प्रतापगढ़। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए इस बार प्रत्याशियों को जेब ढीली करनी होगी। अभी तक चुनाव में दस रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र देना होता था, मगर इस बार इसे बढ़ाकर पचास रुपये कर दिया गया है। इससे अब एक शपथ पत्र बनवाने में लगभग सौ रुपये का खर्च आएगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार प्रत्याशियों को जेब ढीली करनी होगी। किसी भी पद के लिए नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। शपथ पत्र नहीं देने वाले प्रत्याशियों का नामांकन पत्र खारिज हो सकता है। वर्ष 2015 के चुनाव में प्रत्याशियों को दस रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र देना होता था, मगर इस वर्ष शासन ने इसे बढ़ाकर पचास रुपये कर दिया है। 50 रुपये के स्टांप पेपर पर 20 रुपये का नोटरी टिकट भी लगेगा। इस प्रकार अगर कोई व्यक्ति कंप्यूटर टाइप कराकर शपथपत्र बनवाता है, तो इससे उसे कम से कम सौ रुपये खर्च करने होंगे।
हालांकि जिले में दस रुपये का स्टांप पहले ही खत्म हो चुका है। पचास रुपये का स्टांप ट्रेजरी और स्टांप वेंडरों के पास उपलब्ध है। फिलहाल, एक प्रत्याशी को दो शपथ पत्र देने होंगे। पहला चल-अचल संपत्ति से संबंधित होगा जबकि दूसरा नामांकन के समय दाखिल सभी अभिलेखों को प्रमाणित करने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
शासन ने इस वर्ष पचास रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। यह बात सही है कि वर्ष 2015 के चुनाव में दस रुपये के स्टांप पेपर पर प्रत्याशियों ने शपथपत्र दिया था। शत्रोहन वैश्य, एडीएम
1995 के बाद से कुसुवापुर में नहीं आई अनुसूचित जाति की सीट
कुंडा। 1995 के बाद से अब तक अनुसूचित जाति की सीट न आने से कुसुवापुर के लोगों में आक्रोश है। इस बार भी प्रधानी की सीट सामान्य सीट हो गई है। इसके चलते आपत्ति दर्ज कराई गई है। कालाकांकर विकास खंड के कुसुवापुर टिकरियामऊ गांव निवासी विजय कुमार निर्मल ने जिला विकास अधिकारी को पत्र भेजकर कहा है कि 1995 के बाद से गांव में पंचायत चुनाव में कोई भी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई। इस बार भी सीट सामान्य कर दी गई है।