रबी के सीजन में इस बार उर्वरक की कमी नहीं होगी। कृषि विभाग ने रबी के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इस बार जिले में 19 हजार एमटी डीएपी का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार दो हजार एमटी डीएपी का लक्ष्य बढ़ा है। भंडारण अभी से शुरू हो गया है। ऐसे में बुवाई व टॉप ड्रेसिंग के दौरान किसानों को उर्वरक के लिए समितियों एवं दुकानों की परिक्रमा नहीं करनी पड़ेगी।
जिले में कुल 200 समितियां हैं। इसके अलावा 300 से अधिक पंजीकृत खाद की दुकानें हैं। खरीफ की अपेक्षा रबी के सीजन में उर्वरक का अधिक इस्तेमाल होता है। खास तौर गेहूं व आलू की फसल में। दरअसल, गेहूं की फसल की सिंचाई चार से पांच बार होती है। इसके बाद टॉप ड्रेसिंग की जाती है। इसमें उर्वरक का इस्तेेमाल किया जाता है। इसके अलावा चना, मटर, सरसों आदि फसलों के लिए भी उर्वरक की डिमांड रहती है।
फसलों की बुवाई व टॉप ड्रेसिंग के समय समितियों में यूरिया और डीएपी के लिए लंबी लाइन लगी रहती है। डिमांड अधिक होने व स्टॉक कम होने पर समितियों एवं दुकानों पर धक्कामुक्की होने लगती है, लेकिन इस बार रबी के सीजन में किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। दरअसल, इस बार उर्वरक का स्टॉक का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पिछले साल डीएपी का लक्ष्य 17 हजार एमटी था, जबकि इस बार 19 हजार एमटी डीएपी का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं यूरिया का लक्ष्य साढ़े 34 हजार था, जो इस बार बढ़ाकर 37 हजार एमटी कर दिया गया है। खास बात यह है कि यूरिया का भंडारण साढ़े हजार एमटी हो चुका है और डीएपी के स्टॉक की दो खेप आ चुकी हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि रबी के सीजन के लिए पहले से ही उर्वरक का भंडारण किया जा रहा है। रोज 13 एमटी का स्टॉक आ रहा है। इस बार पिछले साल की अपेक्षा लक्ष्य बढ़ा है, जिससे किसानों को दिक्कत न हो।