प्रतापगढ़। फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में जेल भेजे गए कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह के करीबी निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी को बैरक में रातभर नींद नहीं आई। मच्छरों के हमले के बीच उन्होंने करवटें बदलकर रात बिताई। सूर्योदय के साथ ही वह उठ गए और बिना चीनी वाली चाय मांगी। जेल प्रशासन भी उन्हें लेकर सतर्क नजर आया। दूसरे बंदियों को उनसे दूर रखने का प्रयास किया जाता रहा।
फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में कोर्ट ने पूर्व मंत्री व कुंडा विधायक रघुराजप्रताप सिंह राजाभैया के करीबी निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी को मंगलवार को जेल भेज दिया था। जेल प्रशासन ने गोपालजी को सुरक्षित बैरक 11 बी की सफाई कराने के बाद शिफ्ट कर दिया। जेल सूत्रों के अनुसार, रात में उन्हें खाने के लिए दाल-रोटी व सलाद के साथ ही हरी सब्जी परोसी गई। हालांकि उन्होंने दाल के साथ सिर्फ एक चपाती व सलाद खाया। बैरक में उन्हें नींद नहीं आ सकी।
मच्छरों के हमले से वह परेशान रहे। वह तनाव में दिखे और रात एक बजे तक तो जागते रहे। सुरक्षा के लिए तैनात बंदीरक्षकों से बातचीत करते हुए समय काटते रहे। दो बजे के करीब आराम करने के लिए लेटे, मगर नींद नहीं आ रही थी। इसलिए करवटें बदलते रहे। सुबह जल्द उठ गए। दैनिक क्रिया से निवृत्त होने के बाद बिना चीनी की चाय मांगी। चाय पीने के बाद कुछ दूर बैरक में ही घूमते रहे। बाद में चना व बिस्किट के साथ नाश्ता किया। कोर्ट आने से पहले जेल में बनी सब्जी-रोटी खाई।
सांस लेने में दिक्कत के चलते बुलाए गए चिकित्सक
जेल प्रशासन के अनुसार, रात में अचानक निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उनका ऑक्सीजन लेवल भी कम मिला। चूंकि उनका मधुमेह समेत दूसरी बीमारियों का उपचार चल रहा है। इसलिए चिकित्सक ने जांच करने के बाद उन्हें दवाएं मुहैया कराई। दवा खाने के बाद उनकी तबीयत में सुधार हो सका।
जेल में निरुद्घ बंदी गोपालजी से मिलने के लिए रहे बेकरार
मंगलवार को जिला कारागार भेजे गए निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी से जेल में निरुद्घ बंदी मिलने के लिए बेकरार रहे। जेल पहुंचते ही बंदियों ने उन्हें घेर लिया। बंदीरक्षक सुरक्षा कारणों से सभी को दूर करते रहे। बुधवार को भी बंदी अक्षय प्रताप सिंह से मिलकर अपनी समस्या बताने के लिए प्रयासरत रहे। कुछ बंदियों से ही उनकी मुलाकात हो सकी।