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दूर होगी किल्लत, जिले को मिली 4200 एमटी डीएपी

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रबी के सीजन में डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिले में 42 एमटी डीएपी का स्टाक मिला है। इसमें साधन सहकारी समितियों व निजी खाद की दुकानों का स्टाक है। सोमवार से इफ्को फूलपुर से डीएपी की रैक आना शुरू हो जाएगी। इससे किसानों को राहत मिल जाएगी।
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जिले में कुल 200 समितियां हैं। इसके अलावा 300 से अधिक पंजीकृत खाद की दुकानें हैं। खरीफ की अपेक्षा रबी के सीजन में उर्वरक का अधिक इस्तेमाल होता है। जिले में रबी के सीजन में 21 हजार एमटी डीएपी का लक्ष्य है। डीएपी का इस्तेमाल गेहूं व आलू की फसल में अधिक होता है। खासतौर पर बुवाई के दौरान। इन दिनों में जिले में गेहूं व आलू की बुवाई शुरू है। इससे डीएपी की खपत अधिक है।
21 हजार एमटी डीएपी लक्ष्य के सापेक्ष जिले में अब तक महज 10 हजार एमटी ही डीएपी का स्टाक आया है। जबकि बुवाई के दौरान आमतौर पर लगभग 15 हजार एमटी डीएपी की खपत होती है। मगर बुवाई के मुख्य समय में साधन सहकारी समितियों एवं पंजीकृत खाद की दुकानों पर डीएपी की किल्लत बनी हुई है। डीएपी न होने से किसान समितियों एवं दुकानों का चक्कर लगा रहे है। डीएपी की किल्लत की वहज से वह बुवाई नहीं कर पा रहे है। मगर अब समितियों एवं पंजीकृत दुकानों पर डीएपी की किल्लत नहीं रहेगी। इफ्को फूलपुर से जिले के लिए 4200 एमटी डीएपी का स्टाक भेजा जाएगा।
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इसमें 2700 एमटी डीएपी साधन सहकारी समितियों में जबकि 1500 एमटी डीएपी पंजीकृत खाद की दुकानों में भेजा जाएगा। सोमवार को 1000 एमटी डीएपी की खेप का आना शुरू हो जाएगा। 18 नवंबर तक कुल 4200 एमटी डीएपी का स्टाक आएगा। इसके शहर स्थित गोदाम से पंजीकृत खाद की दुकानों एवं समितियों को डीएपी का स्टाक भेजा जाएगा। जिला कृषि अधिकारी डा अश्वनी सिंह ने बताया कि समितियों एवं दुकानों पर डीएपी की कमी नहीं होने पाएगी। जिलेभर में छापेमारी का अभियान भी जारी है। खाद वितरण में अनियमितता पाए जाने पर समितियों एवं दुकान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
टॉप ड्रेसिंग में नहीं होगी खाद की दिक्कत
गेहूं की फसल की सिंचाई चार से पांच बार होती है। इसके बाद टॉप ड्रेसिंग की जाती है। इसमें उर्वरक का इस्तेेमाल किया जाता है। इसके अलावा चना, मटर, सरसों आदि फसलों के लिए भी उर्वरक की डिमांड रहती है। डिमांड के अनुरूप डीएपी व यूरिया का स्टाक पहले से ही डंप किया जाएगा।
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