बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर परीक्षक लापरवाही बरत रहे है। परीक्षकों पर वेतन काटने व सख्त कार्रवाई की चेतावनी का तनिक भी असर नहीं है। चारों मूल्यांकन केंद्रों पर परीक्षकों की अनुपस्थिति बदस्तूर जारी है। यही वजह है कि मूल्यांकन कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है। मूल्यांकन करने के लिए आई कुल 8 लाख उत्तरपुस्तिकाओं के सापेक्ष अब तक लगभग 4 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो सका है। इधर बोर्ड ने मूल्यांकन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर आठ मई कर दी है। ऐसे में अभी मूल्यांकन कार्य लंबा खिंचने का आसार है।
यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए जिले में चार केंद्र बनाए गए हैं। शहर के जीआईसी, केपी इंटर कॉलेज, पीबी इंटर कॉलेज व तिलक इंटर कॉलेज में कापियों का मूल्यांकन किया जाएगा। लगभग 8 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना था। मूल्यांकन कार्य पूरा करने की अंतिम तिथि दो मई निर्धारित की गई थी। इसके लिए दो हजार से अधिक परीक्षक लगाए गए है। मगर परीक्षक इस बार मूल्यांकन कार्य में सक्रिय नहीं है।
हर रोज चारों मूल्यांकन केंद्र पर डेढ़ सौ अधिक परीक्षक अनुपस्थित चल रहे है। यही वजह है कि निर्धारित तिथि पर मूल्यांकन कार्य पूरा नहीं हो पाया। आठ लाख उत्तरपुस्तिकाओं के सापेक्ष सिर्फ 4 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का ही मूल्यांकन अब तक हो सका है। मूल्यांकन के शुरूआती दौर में डीआईओएस ने अनुपस्थित चल रहे शिक्षकों के खिलाफ वेतन तक काटने का अल्टीमेटम दिया, मगर इसके बाद भी उनपर कोई असर नहीं पड़ा।
अब बोर्ड ने छह दिन और मूल्यांकन की तिथि बढ़ा दी है। अब आठ मई तक मूल्यांकन कार्य होगा। इसके बाद भी अगर परीक्षकों की लापरवाही ऐसे ही बनी रहीं, तो मूल्यांकन कार्य और भी खिंच सकता है। इसका असर परिणाम पर भी पड़ेगा। डीआईओएस डा. सर्वदानंद ने पहले की तरह फिर दावा किया कि परीक्षकों को मूल्यांकन के लिए निर्देशित किया गया है। लापरवाही बरतने वाले परीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।