जिले के 40 रोजगार सेवकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। नगर पालिका परिषद और टाउन एरिया के विस्तार में ग्राम पंचायतों में तैनात रोजगार सेवक साल भर से मानदेय नहीं मिलने के कारण अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि शासन ने साफ कहा था कि जो रोजगार सेवक तैनात हैं, उन्हें हटाया नहीं जाएगा, बल्कि समायोजित किया जाएगा।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक रोजगार सेवकों की तैनाती की गई है। ये लोग ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों की जिम्मेदारी निभाते हैं। वर्ष 2020 में नगर पालिका परिषद और टाउन एरिया के विस्तार में 64 ग्राम पंचायतों के शहर में शामिल होने से 40 रोजगार सेवक बेरोजगार हो गए हैं।
शहरी इलाके का सीमा विस्तार के बाद पैदल हुए रोजगार सेवकों ने लखनऊ में बैठे अफसरों से संपर्क करके अपनी व्यथा सुनाई, तो अफसरों ने पत्र जारी कर उन्हें खाली पड़ी ग्राम पंचायतों में समायोजित करने का निर्देश दिया। साल भर का समय बीत गया, मगर जिला स्तरीय अफसरों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। इधर, सालभर से रोजगार सेवकों को मानदेय नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
रोजगार सेवकों को समायोजित करने की कार्रवाई प्रारंभ हो गई है, जल्द ही खाली पड़ी ग्राम पंचायतों में तैनात किया जाएगा। नए रोजगार सेवकों की भर्ती अभी नहीं होगी। जो पहले से तैनात हैं, उन लोगों को समायोजित किया जाएगा।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी