स्वामी करपात्री जी महाराज स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीगंज को राज्य विश्वविद्यालय का शोध केंद्र बनाया है। अंग्रेजी विषय में छात्र अब इस महाविद्यालय में शोध कार्य कर सकेंगे। वहीं, विश्वविद्यालय ने राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के 14 विषयों के 60 शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इसमें नौ महिला शिक्षिकाओं को भी जिम्मेदारी मिली है। सर्वाधिक शोध पर्यवेक्षक हिंदी और प्राचीन इतिहास विषय में बनाए गए हैं। इन विषयों में 10 शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है। जबकि मध्यकालीन इतिहास, सैन्य विज्ञान और भौतिक विज्ञान विषय के एक-एक पर्यवेक्षक बनाए गए हैं।
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय ने अप्रैल माह में शोध प्रवेश परीक्षा कराई थी। उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सूची जारी होने के बाद उन्हें दो माह का कोर्स वर्क कराया गया। वहीं, विवि ने रविवार को शोध केंद्रों की सूची जारी की। विद्या परिषद की संस्तुति पर कार्य परिषद ने स्वामी करपात्री जी महाराज महाविद्यालय को शोध केंद्र बनाया गया है। साथ ही शोध पर्यवेक्षकों की सूची जारी होने के बाद शिक्षकों में भी खुशी की लहर है। कुलसचिव संजय कुमार ने बताया कि शोध केंद्रों के साथ ही शोध पर्यवेक्षकों की सूची जारी की गई है।
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अनुदानित कॉलेजाें को लगा झटका
राज्य विवि ने शोध केंद्र की सूची में जिले के एक राजकीय कॉलेज का ही नाम शामिल किया है। जबकि सात अनुदानित कॉलेजों में से किसी का भी नाम शोध केंद्र सूची में शामिल नहीं किया गया है। शोध केंद्र बनाने के पहले अनुदानित कॉलेजों से भी आवेदन मांगा गया था। इसके बावजूद सातों अनुदानित कॉलेजों में किसी का नाम शामिल नहीं किया गया है। वहीं, तीन राजकीय कॉलेजों को भी शोध केंद्र सूची से बाहर कर दिया गया है।