पट्टी कोतवाली के बीबीपुर बारडीह गांव में शनिवार को चूल्हे की चिंगारी शोला बन गई। रिहायशी छप्पर में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इससे छप्पर के नीचे सो रहे मासूम भाई-बहन जिंदा जल मरे। घर की गृहस्थी पलभर में जलकर राख हो गई। घटना से गांव में कोहराम मच गया। अपने बच्चों के लिए माता-पिता बिलखते रहे। फायरब्रिगेड की मदद से ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई।
पट्टी कोतवाली के बीबीपुर बारडीह निवासी फूलचंद्र अपने परिवार के साथ छप्पर में रहता था। पत्नी रेखा अपने आठ बच्चों के साथ गुजर बसर करता थी। शनिवार दोपहर फूलचंद्र का चार साल का बेटा बबलू व एक साल की बेटी शांति छप्पर के नीचे सो रही थी। दोपहर में अचानक चूल्हे की चिंगारी उड़कर हवा के साथ छप्पर पर आ गिरी। जिससे चिंगारी सुलगते हुए शोला बन गई। जब तक लोगों की नजर पड़ती तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। छप्पर बस्ती से दूर खेत में होने के कारण लोगों को आने में देर हो गई। आग से जल रहा छप्पर नीचे बच्चों के ऊपर आ गिरा। जिससे दोनों बच्चे जिंदा जल मरे। घर में सो रहे बच्चों की मौत से फूलचंद्र की पत्नी रेखा बदहवास होकर चिल्लाने लगी। मौके पर जुटे ग्रामीण आग बुझाने के लिए मशक्कत करने लगे। सूचना पर दमकलकर्मी भी आ गए। ग्रामीणों ने किसी तरह फायरब्रिगेड के सहयोग से आग पर काबू पाया। बच्चों की मौत की खबर मिलने पर पट्टी कोतवाल भागकर मौके पर पहुंचे। घटना से सनसनी फैल गई। राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर दूसरे लोग मदद का वादा करते रहे। फूलचंद्र और उसकी पत्नी रेखा का रो-रोकर बुरा हाल रहा। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
छोटे भाई व बहन का शव देख रोते रहे परिजन
फूलचंद्र के आठ बच्चे थे। सबसे बड़ा आलोक, विपिन, नितिन,विंदू, नरेन्द्र, राहुल हैं। सबसे छोटा बबलू व बेटी शांति थी। दोनों की मौत से पूरे गांव में कोहराम मचा रहा। हर कोई परिवार को सांत्वना देते नजर आया। मां रेखा की चीत्कार से हर कोई दहल जा रहा था। गांव की महिलाएं रेखा देवी को संभालने में जुटी थीं, लेकिन उसका करुण क्रंदन हर किसी को गमजदा कर रहा था। रोते रोते वह अचेत हो जा रही थी। पट्टी कोतवाल उसे घटनास्थल से कोतवाली आए और उपचार के लिए सीएचसी भेजा।
तन के कपड़े भी नहीं बचे, दूसरे से दिलाई गई मदद
अगलगी से पीड़ित परिवार की समूची गृहस्थी राख हो गई। फूलचंद्र के तन पर कपड़े भी नहीं थे। पुलिसकर्मी उसे मृत बच्चों के साथ पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहते थे। इस पर ग्राम प्रधान ने कपड़ा उपलब्ध कराया। जिसके बाद वह शवों के साथ मुख्यालय गया। प्रधान की ओर से पीड़ित परिवार को खाने पीने की सामाग्री उपलब्ध कराई गई। एसडीएम पट्टी विनोद कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार को हर संभव मदद मिलेगी।