जिले की रामपुर खास विधानसभा से 1980 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे प्रमोदी तिवारी ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी हार का मुंह नहीं देखा। वह कांग्रेस से ही रामपुर खास से रिकार्ड लगातार नौ बार विधायक रहे। इसके बाद वर्ष 2012 में वह सपा के सहयोग से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए थे।
पिछले करीब 42 साल से रामपुर खास विधानसभा में कांग्रेस से लगातार पटखनी खा रही भाजपा राजस्थान में भी कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी का चक्रव्यूह नहीं भेद पाई। राज्यसभा चुनाव मैदान में उतरे प्रमोद तिवारी ने 11 मतों से जीत हासिल करते हुए अपने अजेय रहने के रिकार्ड को बरकरार रखा। उनकी जीत की खबर मिलते ही जिले के कांग्रेसी झूम उठे।
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जिले की रामपुर खास विधानसभा से 1980 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे प्रमोद तिवारी ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी हार का मुंह नहीं देखा। वह कांग्रेस से ही रामपुर खास से रिकार्ड लगातार नौ बार विधायक रहे। इसके बाद वर्ष 2012 में वह सपा के सहयोग से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए थे। उनके राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद रिक्त हुई रामपुर खास विधानसभा सीट पर उनकी बेटी आराधना मिश्रा मोना ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी।
राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चार साल तक सियासत की मुख्यधारा से बाहर रहते हुए भी प्रमोद तिवारी संगठन के प्रति समर्पित रहते हुए पार्टी का भरोसा जीतने में कामयाब रहे। हाल ही में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने राजस्थान से उन्हें उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव को भी प्रमोद तिवारी ने मजबूती से लड़ा। शुक्रवार को मतदान के बाद परिणाम आया तो कांग्रेसी झूम उठे। राजस्थान से प्रमोद तिवारी ने 11 मतों से जीत हासिल की। उनकी जीत की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यालय पर आतिशबाजी शुरू हो गई।