Plant is operational, corona patients are not admitted, yet oxygen worth 11 lakhs was purchased
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय की महिला विंग में करोड़ों की लागत से ऑक्सीजन प्लांट तैयार किया गया है। कागजों में ऑक्सीजन प्लांट चल रहा है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने बीते वर्ष अप्रैल से दिसंबर के बीच 10,97719 रुपये की ऑक्सीजन बाहर से खरीदा। जबकि कोरोना काल के दौरान अस्पताल में कोविड के एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। इससे अस्पताल प्रशासन के दावे के साथ ऑक्सीजन प्लांट पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय की महिला विंग में बने 13 बेड के एसएनसीयू को छोड़कर अन्य किसी वार्ड में आमतौर पर ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है। कोरोना महामारी के दौरान प्रताप बहादुर चिकित्सालय में दो-दो ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। एक पुरुष विंग तो दूसरा 100 बेड महिला अस्पताल में। पाइप लाइन के सहारे ऑक्सीजन की सप्लाई दी गई। सौ बेड के महिला अस्पताल में 13 बेड के एसएनसीयू को छोड़कर अन्य मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है।
इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने अप्रैल से दिसंबर 2021 तक के बीच 10,97719 रुपये की सिलिंडरों में ऑक्सीजन रीफिलिंग का बिल तैयार कर शासन को भुगतान के लिए भेज दिया। अब शासन ने भुगतान रोक दिया है। इस पर कार्यदायी संस्था ने सीएमओ को पत्र भेजकर भुगतान कराए जाने की मांग की है।
उधर, अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि आठ माह के भीतर इतनी ऑक्सीजन की खपत महज एसएनसीयू वार्ड या फिर महिला अस्पताल में नहीं हो सकती है। यदि इतनी रकम खर्च करनी थी तो फिर करोड़ों की लागत से बने ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन कहां जा रही थी। इस बारे में अफसर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
ऑक्सीजन प्लांट से क्यों नहीं दी गई सप्लाई
महिला विंग में ऑक्सीजन प्लांट का संचालन किया जा रहा है। इसके बावजूद प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई क्यों नहीं की गई। इतनी बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन बाहर से क्यों खरीदी गई। जबकि ऑक्सीजन प्लांट के संचालन के लिए कर्मचारी की भी तैनाती की गई है।
ऑक्सीजन प्लांट लग गया है। अभी सप्लाई चालू नहीं है। बकाया बिल अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच का है। जंबो सिलिंडर से एसएनसीयू में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है। डॉक्टर रीना प्रसाद, सीएमएस