ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती में फर्जीवाड़ा चल रहा है। फर्जी अंकपत्र के सहारे प्रधान अपने लोगों को पंचायत सहायक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। डीपीआरओ की जांच में तीन ऐसे ही मामले पकड़ में आए हैं, जिनमें फर्जी डिग्री के सहारे पंचायत सहायक की तैनाती का प्रयास किया गया। ऐसे में चयन समिति ने दूसरे स्थान पर रहने वाले अभ्यर्थियों के चयन पर मुहर लगा दी है। उधर, जिले की 70 ग्राम पंचायतों ने अभी तक चयनितों की सूची नहीं जमा की है।
जिले की 1193 ग्राम पंचायतों में छह-छह हजार रुपये मानदेय पर पंचायत सहायकों की नियुक्ति होनी है। ग्राम पंचायतों को चयनित अभ्यर्थियों की सूची बनाकर डीपीआरओ की संस्तुति लेनी थी। दस सितंबर को अंतिम तिथि थी, मगर जिले की 70 ग्राम पंचायतों से अभी भी चयन सूची नहीं आई है।
इधर, डीपीआरओ कार्यालय में ग्राम पंचायतों से आने वाली चयन सूची का टीम बनाकर परीक्षण किया जा रहा है। पहले स्थान पर रहने वाले अभ्यर्थियों के अंकपत्रों का डीपीआरओ सत्यापन करा रहे हैं। अभी तक के परीक्षण में तीन ग्राम पंचायतों में चयनित पंचायत सहायकों के अंकपत्र फर्जी निकले हैं। इन लोगों ने मेरिट बढ़ाने के लिए अंक बढ़ा दिए थे।
विभागीय अधिकारियों ने फर्जी अंकपत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए दूसरे स्थान पर रहने वाले अभ्यर्थियों के चयन पर मुहर लगा दी है। 322 ग्राम पंचायतों की मेरिट सूची को सही पाने पर चयन समिति ने मुहर लगा दी है। डीपीआरओ रविशंकर द्विवेदी ने बताया कि एक-दो दिन में फाइलों का परीक्षण कर ग्राम पंचायतों से नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए कहा जाएगा।