तकरीबन सौ बरस बाद करवा चौथ पर महासंयोग बन रहा है। पर्व की तैयारी को लेकर बाजार में दुकानें भी गुलजार हैं। आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन तथा वस्त्र की दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी है। शहर के बेल्हा देवी, बलीपुर दुर्गा मंदिर में व्रती महिलाओं की ओर से सामूहिक पूजन की व्यवस्था की जा रही है।
पुरोहित प्रभाकरनाथ पांडेय के अनुसार इस बार चतुर्थी तिथि का संचरण 31 अक्तूबर की रात 10.42 बजे से आरंभ होगा और तिथि पहली नवंबर की रात 09.19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, पहली नवंबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस बार तिथि पर चंद्रमा में मंगल और बुध एक साथ विराजमान हैं। इससे बुध आदित्य योग बन रहा है।
इसके अलावा करवा चौथ के दिन शिवयोग या शिव वास और सर्वार्थ योग भी बन रहा है जो शुभतादायी है। मान्यता है कि करवा चौथ के दिन मां गौरी और भगवान शिव के साथ गणेश भगवान का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।
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आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, कपड़े की दुकानों पर खरीदारी
शहर के चौक, पंजाबी मार्केट, पल्टन बाजार, श्याम बिहारी गली, बाबागंज में ज्वेलरी शॉप पर व्रत रखने वाली महिलाओं की ओर से आभूषण की खरीदारी की जा रही है। स्वर्णकार प्रहलाद खंडेलवाल ने बताया कि पहले से ही सोना से निर्मित आभूषण की अलग-अलग डिजाइन के लिए महिलाओं ने बुकिंग कराई है।
वस्त्रालयों में वाराणसी, नागपुर, दिल्ली, गुजरात में बनी साड़ी की खरीदारी में महिलाएं रुचि दिखा रही हैं। सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर चलनी, कलश सहित अन्य पूजा सामग्री से संबंधित दुकानें भी गुलजार हैं। किराना की दुकानों से बरा बनाने के लिए पंजाब का स्पेशल चावल भी बाजार में उपलब्ध है। ब्यूटी पार्लर में व्रती महिलाओं की ओर से मेहंदी रचाने के लिए बुकिंग कराई गई है।
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कब होगा चंद्रोदय
1 नवंबर 2023 यानी करवा चौथ की रात 08:15 बजे चंद्रोदय होगा। करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 05.36 बजे से 06.54 बजे तक रहेगा। अमृत काल सायं 7.34 बजे से 09.13 बजे तक रहेगा। इस समय चंद्रमा को देखकर व्रत का पारण किया जा सकता है।
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पूजन विधि
करवा चौथ के दिन स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें, फिर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर करवा का चित्र बनाएं। फिर शाम के समय फलक वाले स्थान पर चौकी रखकर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। फिर शिव-पार्वती की तस्वीर लगाएं। पूजा की थाली में दीप, सिंदूर, कुमकुम, रोली और करवे में जल भरकर रखें। फिर करवा चौथ व्रत की कथा सुनें। रात में चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर पूजन करें। इसके बाद पानी पीकर व्रत खोलें।
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निर्जला व्रत रखने के लिए पूरी तैयारी की गई है। इस वर्ष पर्व का अदभुत संयोग है। पूजन विधि का पूरा पालन किया जाएगा।
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करवा चौथ का व्रत रखने से परिवार में शांति का माहौल रहेगा, सुहाग की लंबी आयु की कामना के लिए ऐसा व्रत रखने की मान्यता है। इसके लिए वस्त्रों की खरीदारी के साथ ही पूजन की सामग्री पहले से ही खरीद ली गई है।