सरकारी स्कूलों में विद्युतीकरण के लिए धनराशि मिलने के 19 साल बाद भी 886 प्राइमरी और मिडिल स्कूल में अंधेरा कायम है। गर्मी में बच्चों और शिक्षक पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। ऐसे में बच्चे स्कूल आना बेहतर नहीं समझते। वहीं विभागीय अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को निजी स्कूलों से बराबरी करने के लिए तैयार किया जा रहा है। मगर, जिले के अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जहां पर व्यवस्थाएं न के बराबर है। इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और जिले के 886 स्कूलों में अभी तक बिजली ही नहीं पहुंची है। इससे इन स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि 19 साल पहले बिजली विभाग को कनेक्शन देने के लिए बजट दिया गया था।
मगर अभी तक तार भी नहीं खींचा गया है। ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, बल्कि नगरीय क्षेत्रों के पांच स्कूलों में भी अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग में पूर्व में निर्मित स्कूलों में बिजली कनेक्शन देने के लिए शासन ने बिजली विभाग को बजट दिया था।
मगर, बिजली विभाग ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उस समय कनेक्शन की जो धनराशि दी गई थी, वह बेहद कम थी। इसलिए दी गई धनराशि में कनेक्शन देना संभव नहीं है। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली विभाग को रिमाइंडर भेजकर सभी स्कूलों में अविलंब बिजली कनेक्शन देने को कहा गया है।
अधिकांश स्कूलों से चोरी हो गए पंखे
जिले के अधिकांश स्कूलों से पंखे और बल्ब गायब हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में आए दिन होने वाली चोरी की घटनाओं के चलते ऐसा हो रहा है। स्कूलों को हर वर्ष खरीदने के लिए बजट नहीं मिलने से स्थिति और खराब है।
बिजली विभाग को जो बजट मिला था, उन सभी स्कूलों में कनेक्शन करा दिया गया है। विभाग को धनराशि मिलने के बाद ही बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। चंद्रमा प्रसाद, अधिशाषी अभियंता, विद्युत