बाबागंज के गोगहर गांव में ट्रांसफर लगाते विद्युत विभाग के लोग।
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उमसभरी गर्मी व बारिश के मौसम के बीच लगातार ट्रांसफार्मरों के फुंकने से जिले की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। मांग बढ़ते ही वर्कशॉप की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई है। 48 घंटे तो दूर ट्रांसफार्मर के लिए उपभोक्ताओं को हप्तेभर से अधिक समय तक वर्कशॉप के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में विभाग ट्रांसफार्मर की किल्लत दूर करने के लिए अब दूूसरे वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर उधार लेगा। इसके लिए गैर जनपदों के वर्कशॉप की मदद ली जाएगी। हालांकि स्थिति सामान्य होने पर उन्हें ट्रांसफार्मर लौटा दिए जाएंगे।
जिले में चार विद्युत वितरण पारेषण खंड हैं। रानीगंज, लालगंज, कुंडा व रानीगंज। इनके अंतर्गत कुल 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। शहर में 24 घंटे व गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है। मगर, गर्मी के दिनों में ट्रांसफार्मर फुंकने की वजह से उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाकों में है। दरअसल, जिले में डिमांड बढ़ने से वर्कशॉप की व्यवस्था धड़ाम हो गई है।
चिलबिला वर्कशॉप पर 150 ट्रांसफार्मरों की डिमांड है, जबकि प्रतिदिन सिर्फ 20 ट्रांसफार्मर ही बनकर तैयार हो रहे हैं। ऐसे में डिमांड के मुताबिक ट्रांसफार्मर की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। 48 घंटे की बात तो दूर सप्ताहभर बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदल पा रहे हैं। लोगों को वर्कशॉप की परिक्रमा करनी पड़ रही है।
अब वर्कशॉप की डिमांड पूरी करने के लिए विभाग दूसरे जनपदों के वर्कशॉप की मदद ली जाएगी। वर्कशॉप में ट्रांसफार्मरों की सूची तैयार की जा रही है। जब तक डिमांड बनी हुई है, तब तक इस पहल के जरिए ट्रांसफार्मर की किल्लत दूर की जाएगी।
ट्रांसफार्मर की मांग बढ़ गई है, जबकि समुचित मात्रा में ऑयल की व्यवस्था नहीं है। ऑयल की कमी से ट्रांसफार्मर की मरम्मत में दिक्कत आ रही है। इसके लिए वर्कशॉप से डिमांड भेजी गई है। डिमांड के मुताबिक ट्रांसफार्मर तैयार किए जा रहे हैं। अन्य वर्कशॉप में भी ट्रांसफार्मर के लिए डिमांड भेजी गई है। दिनेश सिंह, एक्सईएन, वर्कशॉप