फर्जीवाड़े पर अंकुश, समय की बचत व कमीशनखोरी से मुक्ति दिलाने के लिए शासन ने स्टांप की छपाई बंद कराकर ई-स्टांप की सुविधा शुरू की, लेकिन इसके बाद भी वेंडरों की मनमानी पर रोक नहीं लग सकी। 10, 50 और 100 रुपये के छोटे स्टांप की किल्लत बताकर स्टांप वेंडर मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
दस रुपये का स्टांप लोग चालीस रुपये में खरीदने के लिए मजबूर हैं। कलेक्ट्रेट व उप निबंधन कार्यालयों में अधिक दाम लेकर स्टांप बेचे जा रहे हैं। अगर किसी ग्राहक ने भूल से ई-स्टांप के कमीशन का विरोध किया, तो तकनीकी कमी बताकर उसे लौटा दिया जाता है।
फर्जीवाड़ा और कमीशनखोरी से ग्राहकों को छुटकारा दिलाने सरकार ने स्टांप की छपाई बंद करा दी है। अब ई-स्टांप प्रणाली लागू की गई है। दस, बीस, पचास और सौ रुपये के स्टांप अब ग्राहक ई-स्टांप के माध्यम से खरीद रहे हैं। ई-स्टांप प्रणाली लागू होने के बाद वेंडरों को कचहरी और तहसीलों में कंप्यूटर लगाना पड़ा और चलाने के लिए ऑपरेटर रखना पड़ा। इससे उनका खर्च बढ़ गया। अब वे अपना खर्च निकालने के लिए तीन गुना अधिक रुपये ले रहे हैं।
ग्राहक मजबूर होकर भुगतान कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को कटकामानापुर निवासी महावीर तिवारी और उमरी गांव निवासी रिपु दमन श्रीवास्तव कचहरी में स्टांप लेने के लिए अधिकृत संग्रह केंद्र पर गए। उन्हें दस रुपये का स्टांप 40 रुपये में दिया जा रहा था। विरोध करने पर तकनीकी खामी की वजह से प्रिंटआउट न निकलने की बात कहकर लौटा दिया गया।
मेरे संज्ञान में ऐसा कोई प्रकरण नहीं आया है। अगर स्टांप वेंडर अधिक रुपये वसूल रहे हैं, तो यह गलत है। शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएंगी। शैलेंद्र सिंह, एआईजी, स्टांप