जिले की साधन सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर पुराने दर की डीएपी का स्टॉक होने के बाद भी दुकानदार नई दर पर खाद बेचकर किसानों को ठग रहे हैं। मार्च माह के पहले डीएपी की पचास किग्रा की बोरी 1200 रुपये में थी। एक अप्रैल से इसका दाम बढ़कर 1350 रुपये हो गया है।
किसान इन दिनों धान की नर्सरी डालने में जुटे हैं। धान की रोपाई करते समय खाद का संकट हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए किसानों ने खाद की खरीदारी प्रारंभ कर दी है। एक अप्रैल से डीएपी की दरों में 150 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोतरी की गई है। अब साधन सहकारी केंद्रों और बिक्री केंद्रों पर 1350 रुपये में पचास किग्रा की बोरी किसानों को मिलेगी। हालांकि बढ़े हुए दर की डीएपी अभी साधन सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर नहीं पहुंची है।
समितियों और दुकानों पर पुराने दाम की डीएपी का स्टॉक डंप है। जिस पर 1200 रुपये मूल्य लिखा है। फिर भी दुकानदार और समितियों पर 1350 रुपये की एक बोरी दी जा रही है। जिले की साधन सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों पर इफको को खाद आपूर्ति की जिम्मेदारी मिली है। इफको ने पत्र जारी कर साधन सहकारी के समितियों के सचिवों से कहा था कि पुरानी खाद को पुराने रेट पर ही बेचा जाए। इसके बाद भी मनमानी की जा रही है।
यूरिया के दाम में नहीं हुई कोई बढ़ोतरी
यूरिया के दाम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। 45 किग्रा की बोरी की बिक्री दर 267.50 रुपये निर्धारित है। चालू वित्तीय वर्ष में अब कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया आ गई है।
डीएपी की बोरियों पर मूल्य लिखा है। जिस बोरी पर जो मूल्य अं कित है, किसानों को वही मूल्य देना है। डीएपी की नई दर 1350 रुपये है। मगर अभी अधिकांश बिक्री केद्रों पर पुराना स्टॉक है। जो सचिव और दुकानदार मनमाने ढंग से रुपये ले रहा है , उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ.अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी