शाजिदा बेगम का आरोप है कि पुलिसकर्मी बिना कुछ पूछे उनके घर का सामान तोड़ने लगे। आलमारी में रखे जेवरात समेटने के बाद उनकी बहू और बेटी के मोबाइल छीन लिए। विरोध करने पर इन दोनों की जमकर पिटाई की। जिससे दोनों बेहोश हो गईं। मासूम पोते व पोती को बिस्तर से उठाकर फेंक दिया। पुलिस प्रशासन उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद यह मामला बार काउंसिल प्रयागराज के अध्यक्ष के पास पहुंचा था। उनकी पहल पर प्रकरण राज्य मानवाधिकार आयोग में पहुंचा।
मामले की जांच राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस अधीक्षक अमित मिश्र ने करते हुए अपनी रिपोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष को भी भेजी थी। सात सितंबर 2021 को भेजी गई गई रिपोर्ट में तत्कालीन कंधई थानाध्यक्ष नीरज वालिया, उपनिरीक्षक शैलेंद्र तिवारी, उपनिरीक्षक सूर्य प्रताप सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मिर्यों को दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पहुंचा जा सकता है। इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है।
राजपत्रित अधिकारी को सौंपी जाएगी मुकदमे की विवेचना
करीब दो साल बाद डीजीपी के निर्देश पर शुक्रवार को कंधई पुलिस ने तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत सौ से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। कंधई थाने में दर्ज पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे की जांच वर्तमान थानाध्यक्ष धीरेंद्र ठाकुर नहीं करेंगे। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुकदमे की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी को सौंपी जाएगी।