ढाई करोड़ रुपये की डीएपी के गबन के मामले में फरार चल रहे निलंबित 50 हजार के इनामी भंडार नायक संतोष कुमार को पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद जेल भेज दिया। इस खेल में विभागीय अफसर, लिपिक व आधा दर्जन समितियों के सचिव समेत वहां काम करने वाले भी शामिल रहे। जिनकी गहनता से छानबीन की जा रही है। जल्द ही उन पर पुलिस शिकंजा कसेगी।
पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने बताया कि ढाई करोड़ रुपये की डीएपी के गबन के मामले में फरार चल रहे भंडार नायक के ऊपर आईजी प्रयागराज द्वारा इनाम 25 से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया था। कोतवाली पुलिस ने सोमवार की रात उसे भुपियामऊ पुल के पास से दबोच लिया। पूछताछ के बाद आरोपी भंडार नायक संतोष कुमार से अहम राज मिले हैं। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, अभिलेखीय साक्ष्य व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर गुणवत्तापूर्वक विवेचना की जा रही है।
इस खेल में जो भी विभागीय अधिकारी, कर्मचारी समेत अन्य लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से अर्जित संपत्ति कुर्क की जाएगी। निलंबित भंडार नायक की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा जोर शोर से विभाग में चल रही है कि 1055 मीट्रिक टन डीएपी के घोटाले में विभाग के दो अफसर भी शामिल रहे हैं। विभाग के लिपिकों के अलावा समितियों के सचिवों की भी मिलीभगत रही है। हालांकि पुलिस इस बाबत अभी कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं है।
ठेकेदार भी आएंगे कार्रवाई की जद में
गोदामों से डीएपी व यूरिया समितियों पर पहुंचाने वाले वाहन ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भाड़ा ढुलाई न मिलने के कारण ठेकेदार लगातार भंडार नायक पर दबाव बना रहे थे। उनके भुगतान के लिए भंडार नायक व विभागीय अधिकारियों ने गबन का रास्ता चुना। बाद में यह कालाबाजारी का जरिया बन गया। जल्द ही पुलिस दो साल से उर्वरक की ढुलाई करने वाले ठेकेदारों से पूछताछ कर सकती है।