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पर्यटन नगरी में शामिल होगा बेल्हा, धार्मिक स्थलों के विकास पर खर्च होंगे करोड़ों रुपये

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बेल्हा के धार्मिक स्थल भी जल्द ही पर्यटन के नक्शे में शामिल नजर आएंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अब धार्मिक स्थलों के विकास पर 12.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। देवीधाम मां बेल्हा देवी, चंद्रिका देवी, घुइसरनाथधाम और मां बाराही धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।
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जिले के लोगों का पर्यटन की ओर बढ़ते रुझान को देखते हुए शासन ने अब बेल्हा के धार्मिक स्थलों को पर्यटन के मानचित्र में शामिल करने का फैसला किया है। इससे पहले इन धार्मिक स्थलों को विकास किया जाना है। मां बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी धाम, घुइसरनाथधाम और मां बाराही धाम में आने वाले पर्यटकों के लिए पार्क, फौव्वारा के साथ ही नौकाविहार का आनंद उठाएंगे। मां चंद्रिका देवी के 65 बीघे जंगल को रमणीय स्थल बनाया जाएगा।
पशु-पशुओं को रहने पानी पीने के लिए विशालकाय तालाब का निर्माण कराया जाएगा। सई तट पर स्थित मां बेल्हाधाम, घुइसरनाथधाम और मां बाराही धाम में आने वाले पर्यटक नौकाविहार का आनंद ले सकेंगे। मां चंद्रिका देवी, मां बाराही देवी, घुइसरनाथधाम के लिए 3.20-3.20 करोड़ रुपये और मां बेल्हा देवी धाम के लिए 3.46 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव में सभी धार्मिक स्थलों पर शौचालय, पेयजल और ठहरने के लिए हॉल का निर्माण कराना प्रस्तावित है। आरईएस ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उस पर जल्द ही मुहर लगने वाली है।
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घूमने- फिरने के लिए नहीं जाना होगा बाहर
देवीधामों के पर्यटन स्थल के नक्शे में शामिल होने के बाद जिले के लोगों को घूमने-फिरने के लिए जिले से बाहर नहीं जाना होगा, बल्कि इन्हीं धार्मिक स्थलों के घूमने में अपना समय बिताएंगे। छुट्टी के दिनों में प्राय: शहर के लोग घूमने के लिए बाहर जाते हैं।
मिलेगा रोजगार, बढ़ेगी कमाई
धार्मिक स्थलों को विकसित करने के पीछे बेरोजगारों को रोजगार मिलने और पहले से खुली दुकानों की कमाई भी बढ़ेगी। दरअसल में पर्यटन स्थलों पर जो लोग घूमने -फिरने आएंगे। उससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
जिले के धार्मिक स्थलों का विकास करने के लिए प्राकलन तैयार कर शासन को भेजा गया है। धनराशि आवंटित होते ही विकास कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। विकास अग्रवाल, अधिशाषी अभियंता, आरईएस
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