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Pratapgarh News: घर- आंगन में चल रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र

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प्रतापगढ़। जिले के शून्य से तीन वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक आहार के साथ ही अक्षर का ज्ञान कराया जाता है। जिले के 17 ब्लाकों में 3256 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। इनमें शहर में 13 आंगनबाड़ी केंद्रों का यह हाल है कि अधिकांश केंद्र घर -आंगन में चल रहे हैं। घर में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र कितना बेहतर हो सकते हैं, इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं। बुधवार को अमर उजाला ने इन केंद्रों की हकीकत देखने का प्रयास किया। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट।
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आंगनबाड़ी केंद्र टक्करगंज
समय 11.45 बजे आंगनबाड़ी केंद्र खुला था। आंगनबाड़ी मौजूद नहीं थी, सहायिका तीन बच्चों के साथ उपस्थित रहीं। सहायिका ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के भाभी की तबियत खराब होने पर अस्पताल गई थी। केंद्र पर 35 बच्चे नामांकित थे, जबकि तीन बच्चे मौजूद मिले हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र पूर्वी सहोदरपुर
समय 11.15 बजे आंगनबाड़ी केंद्र खुला हुआ था और छह बच्चे धूप में बैठे हुए थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूनम ने बताया कि केंद्र पर 40 बच्चे पंजीकृत हैं, मगर आज छह ही बच्चे आए हैं। इनमें से अधिकांश पड़ोस में शादी होने के कारण चले गए हैं। जबकि स्थानीय लोगों ने बताया कि इतने बच्चे ही प्रतिदिन रहते हैं।
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आंगनबाड़ी केंद्र दहिलामऊ
12.05 बजे संविलियन स्कूल दहिलामऊ में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन नहीं है। बुधवार को आसमान के नीचे बच्चों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठी हुई थीं। रजिस्टर में 70 बच्चों के नाम अंकित है, मगर बुधवार को सिर्फ 16 बच्चे ही उपस्थित मिले।
कागज पर स्कूल में चल रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र
शहर के आंगनबाड़ी केंद्र भले ही घरों में चल रहे हैं, मगर लिखा-पढ़ी में यह केंद्र प्राइमरी स्कूलों में चल रहे हैं। शासन ने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राइमरी स्कूल में चलने का आदेश दिया है। घर में केंद्र चलाने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
शहर में 13 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, यह आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूलों में संचालित है। स्कूल में कोई दिक्कत आने पर घर पर केंद्र संचालित किया जा रहा होगा। फिलहाल, नोटिस जारी कर वास्तविकता की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
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पवन कुमार यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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