तमाम कोशिशों के बावजूद यूपी में केवल 9,000 से 11000 मेगावाट तक ही बिजली की उपलब्धता हो पा रही है।
इसी के चलते भारी आपात कटौती की जा रही है, लेकिन कौन है इसके लिए दोषी?
अगर राज्य सरकार की मानें तो इसके लिए पूर्ववर्ती बसपा सरकार जिम्मेदार है।
पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने शुक्रवार को यहां कहा कि प्रदेश में बसपा राज के कुशासन का दुष्परिणाम आम जनता को भेगना पड़ रहा है। विकास कार्य अवरुद्ध रहे।
पांच साल की सरकार में एक मेगावाट बिजली के भी उत्पादन की चिंता नहीं की गई। सरकार बिजली संकट से चिंतित है और जनता को बिजली समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयासरत है।
प्रवक्ता चौधरी ने आरोप लगाया कि बसपा सरकार उधार की बिजली खरीदती रही। इससे सूबे पर तीस हजार करोड़ रुपये का भारी कर्ज चढ़ गया। बसपा की सरकार ने बिजली संयंत्रों के रखरखाव की भी चिंता नहीं की।
प्रदेश में बिजली की मांग 12,500 मेगावाट से ऊपर पहुंच चुकी है। उपलब्धता 9,000 से 11000 मेगावाट के बीच ही है। जनता को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में कई फैसले किए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर 33/11 केवी के कुल 338 नए वितरण उपकेंद्रों के निर्माण का फैसला किया गया है।
नई परियोजनाओं में 1980 मेगावाट की ललितपुर परियोजना का निर्माण कार्य तीव्रगति से चल रहा है तथा इसकी प्रथम इकाई के सितंबर 2014 तक चालू हो जाने की संभावना है।
अन्य कई योजनाओं पर भी काम चल रहा है। अगले कुछ महीनों में बिजली संकट का समाधान कर लिया जाएगा।