गाजियाबाद में बिल्डर परिवार को मौत की नींद सुलाने वाला राहुल वर्मा डिप्रेशन का शिकार हो गया है।
शुक्रवार सुबह जेल में वह काफी नर्वस था। जेल प्रशासन को उसकी काउंसलिंग तक करनी पड़ी।
उसकी निगरानी के लिए एक नंबरदार और एक सिपाही की ड्यूटी लगाई गई है। उसके खाने-पीने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज ने बताया कि काउंसलिंग के बाद वह कुछ नार्मल हुआ है। इसके बाद उसने दोपहर का खाना भी खाया। डिप्रेशन की स्थिति में वह कोई गलत कदम न उठा ले, इसके लिए 24 घंटे उस पर नजर रखी जा रही है।
दूसरी ओर जेल के बंदियों में भी राहुल को लेकर आक्रोश है। जेल प्रशासन का कहना है कि सात हत्याओं में तीन मासूम बच्चे थे। इसी के चलते बंदी आक्रोशित हैं।
ऐसे में कहीं बंदी राहुल पर हमला न कर दें, इसके मद्देनजर उसे 7बी बैरक में बंदियों से अलग रखा गया है। इस बैरक में कुल 27 बंदी हैं। संयम बरतने के लिए इन सभी बंदियों की भी काउंसलिंग की गई है।
‘बृहस्पतिवार शाम को जब राहुल जेल आया था तो वह बिलकुल नार्मल था। शुक्रवार सुबह बैरक राउंड के दौरान उन्होंने राहुल से बात की तो वह डिप्रेशन में नजर आया। वह बहुत कम बातें कर रहा था। ज्यादातर सवालों का जवाब सिर्फ हां या ना में ही दे रहा था।’
- डा. वीरेश राज शर्मा, डासना जेल अधीक्षक