बीसलपुर के गांव हाफिजनगर में एलईडी बल्ब बनाती समूह की सदस्य।
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बीसलपुर। गांव हाफिजनगर बन्हाई के महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं खुद को आत्मनिर्भर बनाने में जुट गईं हैं। एलईडी बल्ब का व्यवसाय शुरू करके वह खुद को स्थापित करने में लगातार आगे बढ़ रही हैं। समूह ने 19 दिनों में 190 एलईडी बल्ब बनाए और उनसे बिक्री कर कमाई भी की। अब उनका हौसला बढ़ा है और इसी को व्यवसाय बनाकर आगे बढ़ने की ठान ली है।
सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी) रोहिताश कुमार ने बताया कि गांव हाफिजनगर बन्हाई की 11 साक्षर महिलाओं ने आत्म निर्भर बनने के क्रम में सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद माह अक्तूबर 2020 अंकित महिला स्वयं सहायता समूह गठित किया था। समूह में एक महिला को अध्यक्ष, एक को सचिव, एक को कोषाध्यक्ष और बाकी आठ महिलाओं को सदस्य बनाया गया। समूह का बैक ऑफ बड़ौदा की स्थानीय शाखा में खाता खोल दिया गया। महिलाओं ने व्यवसाय शुरू करने के लिए आपसी चंदे से 18000 हजार की धनराशि एकत्र कर ली। विभाग की ओर से उन्हें 15000 रुपये का रिवाल्विंग फंड भी दिया गया। उसके बाद इन महिलाओं ने 33000 रुपये की लागत से एलईडी बल्ब बनाने का व्यवसाय पहली जून से शुरू कर दिया। समूह ने बल्ब बनाने का मैटेरियल दिल्ली से मंगाया। समूह की अध्यक्ष मुन्नी देवी ने बताया कि उन्होंने अपनी बैठक में ही कार्यशाला बनाई। समूह ने पहली जून से 19 जून तक 190 बल्ब बनाकर बाजार में बेच दिए। बल्ब बनाने में 35 रुपये की लागत आती है और तैयार बल्ब 55 रुपये में बाजार में बिक जाता है। इस प्रकार एक बल्ब में समूह को 20 रुपये का लाभ हो जाता है। अब तक बनाए गए 190 बल्बों को बेचा जा चुका है। समूह की महिलाएं उत्साहित हैं। एक दिन में 10 बल्ब आसानी से बन जाते हैं। समूह की महिलाओं ने बल्ब बनाने का प्रशिक्षण ब्लॉक कार्यालय में प्राप्त किया था। प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक प्रबंधक मोहम्मद कलीम, जगपाल मौर्य, मोहम्मद ताहिर और अभिनय सक्सेना ने सहायक विकास अधिकारी के निर्देशन में हुआ था। यह व्यवसाय छह माह तक सफलता पूर्ण चलाएंगे। फिर समूह को विभाग की ओर से 1.10 लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे व्यवसाय को गति देने का काम करेंगे। अध्यक्ष मुन्नी देवी ने यह भी बताया कि उन्होंने तैयार किए गए बल्ब बीसलपुर के दुकानदारों को दिए हैं। समूह की सभी महिलाएं घरेलू महिलाएं हैं। महिलाएं सुबह 10 बजे तक अपने घर का काम निपटाकर कार्यशाला में आ जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस व्यवसाय से समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आय होगी, जिससे उनका जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। वह अपने इस समूह को आदर्श समूह बनाने का प्रयास करेंगी, जिससे आसपास के गांव की महिलाएं भी उनसे प्रेरणा ले सकें।