- करोड़ों के प्रस्ताव के बाद भी आधी धनराशि मिलना भी मुश्किल
- हर साल ही तैयार होता है जिले के विकास का लंबा चौड़ा खाका
- 2016-17 के लिए भी प्रभारी मंत्री बलराम सिंह यादव की अध्यक्षता में अप्रैल में होनी है बैठक
जिले के विकास का खाका तैयार कर प्रति वर्ष करोड़ों का बजट प्रस्तावित किया जाता है, लेकिन सरकार धनराशि ही उपलब्ध नहीं कराती, जिससे योजनाएं अधूरी रह जाती हैं। पिछले चार वर्षों में नजर डालें तो अनुमोदित परिव्यय की आधी धनराशि भी जिले को नहीं मिली है।
बारहवीं पंचवर्षीय (2012-17) के तहत जिले के विकास के लिए 1254 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसमें पिछले चार वर्षों से प्रति वर्ष विभिन्न विभागों के माध्यम से जिले के विकास की योजनाओं का प्रस्ताव पास किया जाता है। इस प्रस्ताव को जिले के प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में स्वीकृति कर शासन को भेजा जाता है, लेकिन विकास की यह योजनाएं स्वीकृत धनराशि न मिलने से धरातल पर नहीं उतर पातीं। इससे विकास की घोषणाएं सिर्फ बैठकों तक सीमित होकर रह जाती हैं। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2015-16 में जिले के विकास के लिए 250 करोड़ का बजट पास किया गया था, जिसके सापेक्ष 117 करोड़ की धनराशि ही प्राप्त हुई, जो प्रस्तावित बजट का मात्र 46 प्रतिशत ही है। वहीं इससे पूर्व भी वर्ष 12-13 में भी 110 करोड़ के बजट के सापेक्ष मात्र 30 करोड़, वर्ष 2013-14 व 2014-15 में 110 करोड़ के सापेक्ष क्रमश: 47 करोड़ व 40 करोड़ रुपये की धनराशि ही मिली थी।
अब पुन: वर्ष 2016-17 के लिए भी प्रभारी मंत्री बलराम सिंह यादव की अध्यक्षता में अप्रैल के प्रथम सप्ताह में बैठक की तैयारी है। इसमें भी गत वर्ष की भांति 250 करोड़ के बजट का अनुमोदन कराया जाना प्रस्तावित है। अब देखना है कि इस चुनावी वर्ष में स्वीकृत धनराशि मिलती है यह भी सिर्फ घोषणा ही साबित होगी।