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685 बटाईदार किसानों का सत्यापन अटका, नहीं बिक्री कर पा रहे धान

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पूरनपुर। धान बिक्री के लिए 685 बटाईदार किसानों का सत्यापन फंस गया। सत्यापन न होने से किसान धान की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं और अफसर, कर्मचारियों के चक्कर काट रहे हैं। किसान बटाईदार है या माफिया के असमंजस में कर्मचारी सत्यापन के लिए सबूत मांग रहे है।
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गेहूं, धान बिक्री के लिए किसानों को ऑनलाइन पहले पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के बाद लेखपाल यह सत्यापन करते हैं कि उक्त जमीन पर गेहूं, धान की फसल है या नहीं। फसल किसान, बटाईदार किसने की। लेखपाल की रिपोर्ट के बाद गेहूं, धान की फसल संबंधित खरीद केंद्र पर बिक्री की जा सकती है। अगर जमीन पर बटाईदार ने फसल की है। तब उसको बटाईदारी का सबूत देना होता है। इसके अलावा हल्का लेखपाल को भी अधिकांश जमीनों पर जमीन मालिक खेती कर रहा है या बटाईदार इसकी पड़ताल की जाती है। कुछ मामलों में लेखपाल पड़ताल नहीं भी कर पाते। धान खरीद में तहसील के करीब 685 बटाईदारों का सत्यापन अटक गया। वजह लेखपालों की पड़ताल में इन बटाईदारों के खेती करने की जानकारी नहीं थी। ऐसे किसान अब सत्यापन को तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। सबूत के तौर पर किसानों से बटाईदारी तय होने के समय का सबूत मांगा जा रहा है।
बटाईदारी जमीन को लेने के समय तय होती है। बटाईदारों को जमीन लेने के समय ऐसा कोई सबूत बनवा लेना चाहिए। बटाईदार वास्तविक किसान है या किसी का सस्ते में खरीदे गए धान की बिक्री की कोशिश में है यह जानना मुश्किल हो जाता है। लेखपाल पड़ताल कर इसका पता लगाते हैं। संदेह आदि होने पर बटाईदार से बटाईदारी का सबूत मांगा जाता है। ताकि धान बिक्री करने का फायदा माफिया न उठा सके।
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- अशोक कुुमार गुप्ता, तहसीलदार
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