फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमीन का पेंच दूर, गोमती उद्गम स्थल के पास बनेगा कछुआ संरक्षण केंद्र

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। गोमती उद्गम स्थल के पास जल्द कछुआ संरक्षण केंद्र बनेगा। गोमती ट्रस्ट को दान में मिली यह जमीन के लिए हस्तांतरित होने की बाधा दूर हो गई है। जमीन हस्तांतरित होने के बाद संरक्षण केंद्र विकसित करने का कार्य शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

इन दिनों गोमती उद्गम स्थल को संवारने का काम तेेजी से चल रहा है। आसपास के तालाबों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। गोमती उद्गम स्थल की मुख्य झील में विभिन्न प्रजातियों के दुर्लभ कछुए हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम ना होने से उन पर खतरा मंडराता रहता है। अब इनको संरक्षित करने की कवायद शुरू हुई है। मुख्य झील में बसेरा बनाए कछुओं के लिए अब गोमती उद्गम स्थल पर संरक्षण केंद्र बनेगा। गोमती ट्रस्ट को कुछ जमीन दान दी गई थी। इसी पर संरक्षण केंद्र बनाया जाना है। दस्तावेजों में ट्रस्ट के नाम जमीन हस्तांतरित होने की जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
डीएम पुलकित खरे ने एडीएम एफआर राम सिंह गौतम को सभी दस्तावेज निकलवाने के निर्देश दिए थे। सोमवार को वह फाइल लेकर डीएम के पास पहुंचे। अब जमीन गोमती ट्रस्ट को हस्तांतरित हो जाएगी। बता दें कि करीब माह पहले एक टीम भी सर्वे को पहुंची थी।
विज्ञापन

12 प्रजातियों के हैं कछुए
गोमती उद्गम स्थल की मुख्य झील में करीब 12 प्रजातियों के कछुए हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में 14 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। यह कछुए उद्गम स्थल पर पहुंचने वाले गोमती सेवकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। कछुए झील से आगे न निकल जाएं उनकी सुरक्षा को देखते हुए ट्रस्ट के लोगों ने इसके लिए पानी निकास के दोनों ओर लगे पाइपों में जाली लगवा दी थी। पिछले दिनों ही गोमती के पास दुर्लभ प्रजाति का इंडियन रूफेल टरटल मिला था।
गोमती उद्गम स्थल के पास कछुआ संरक्षण केंद्र बनाया जाना है। कुछ दान की जमीन ट्रस्ट को हस्तांतरित नहीं हो पाई थी। अब समाधान हो गया है। जल्द गोमती उद्गम स्थल पर कछुआ संरक्षण केंद्र विकसित होगा।
विज्ञापन

पुलकित खरे, डीएम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें