बाघिन की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर पहुंच गई। ऐसा कहा गया कि बाघिन को बेहोश करने को रेस्क्यू किया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई, लेकिन दोपहर बाद उच्च स्तरीय अफसरों की ओर से बेहोश करने की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद सामाजिक वानिकी के डीएफओ मौके से रवाना हो गए। तीन टीमें विभाग की निगरानी में लगी रहीं।
पिंजड़े में बांधा गया बकरा
बेहोश करने की अनुमति न मिलने के बाद विभागीय की ओर से पिंजड़ा मंगवाया गया। गोशाला में बाघिन की मौजूदगी वाले क्षेतप्त्र में पिंजड़ा रखा गया। लालच के लिए पिंजड़े में बकरा भी बांधा गया, लेकिन बाघिन पिंजड़े के करीब आने के बाद चहलकदमी करती रही। उसके अंदर नहीं आई।
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रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि गोशाला क्षेत्र में बाघिन की मौजूदगी को लेकर निगरानी की जा रही है। पिंजड़ा लगाया गया। स्थिति के अनुसार ही बाघिन को बेहोश करने की रणनीति पर अमल किया जाएगा।