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11 लोगों की मौतः पहली झपकी के बाद भी नहीं माना ड्राइवर

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घायल कृष्णकुमार - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। बरेली से पीलीभीत के बीच रात में दो बजे एक स्थान पर गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। सब लोगों ने तब चालक से कहा कि अब आगे मत चलो। किसी ढाबे पर रात में सो जाते हैं लेकिन चालक ने किसी की नहीं सुनी। वह यही कह रहा था कि सुबह चार बजे तक गोला पहुंचना है।
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टाटा ऐस में सवार गोला निवासी घायल कृष्णपाल ने बताया कि हादसे से पहले जब गाड़ी डिवाइडर से टकराई थी तो अधिकतर लोग सो रहे थे। गाड़ी टकराने पर झटका लगा और नींद खुली। चालक से पूछा क्या हुआ? उसने कहा- अचानक ट्रक आ गया था, आगे-पीछे देखा तो कहीं कोई ट्रक नहीं था। गाड़ी डिवाइडर से टकराई थी। थोड़ी क्षतिग्रस्त हुई थी। जब चालक नहीं माना तो उसे चाय पिलाई और मुंह धुलवाया।
इसके बाद कहा, गाना बजा लो, ताकि नींद न आए। गाना भी बजाया, लेकिन चालक को झपकी लगी और इतना बड़ा हादसा हो गया। घायल शीलम शुक्ला ने बताया कि सभी ने चालक को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह मान नहीं रहा था। उससे सोने के लिए भी कहा था फिर भी नहीं माना। वह यही कहता रहा कि उसे सुबह चार बजे तक हर हाल में गोला पहुंचना है। कुछ घंटे के लिए अगर रुक जाते तो शायद हादसा नहीं होता। घायल प्रवीण के मुताबिक वह सबसे पीछे बैठा था। इसलिए बच गया। गाड़ी चालक को नींद आने से हादसा हुआ है।
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ऐसा पता होता तो दीदी से मन भर करे बतिया लेती
पीलीभीत। बांकेगंज की रजनी अपने पति विकास अवस्थी और मासूम बेटे के साथ सुबह नौ बजे जिला अस्पताल पहुंची तो दहाड़े मार कर हो रहीं थीं। जिला अस्पताल में अपना इलाज कराने आईं महिला मरीज अपना दर्द भूलकर उन्हें सांत्वना देने में जुट गईं। घटों तक महिलाएं उनके पास थीं। जब उनके रिश्तेदार आए तो वह भी सांत्वना देने लगे। दीदी रचना की यादें करते हुए रजनी बोली- चोट मुझे लगती थी और दर्द दीदी को होता था। आखिरी बार दीदी से बुधवार को शाम छह बजे बातचीत हुई। दीदी ने कहा था कि वह हरिद्वार से चल रहीं हैं। बृहस्पतिवार को सुबह बात होगी लेकिन तब तक हादसे की सूचना मिल गई। मुझे क्या पता था कि यह आखिरी बातचीत है। यदि ऐसा पता होता तो मन भर के बात कर लेती।
गाड़ी के पेड़ से टकराते ही दूर जा गिरे लोग, आगे बैठे थे वो फंस गए
गजरौला। जब गाड़ी पेड़ टकराई तो जो लोग गाड़ी में आगे बैठे थे वे पेड़ और गाड़ी बीच दब गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जो लोग पीछे बैठे थे वे छिटक कर सड़क पर जा गिरे। घायलावस्था में तड़पने लगे। सड़क पर गुजर रहे वाहनों को हाथ दे रहे थे लेकिन कोई रोक नहीं रहा था। तभी गजरौला थाने के दो सिपाही मैजिक गाड़ी से आए। यह लोग गश्त पर थे। अचानक उस मार्ग से गुजर रहे थे। देखा कि गाड़ी पेड़ से टकराकर तिरछी हो गई है और घायल तड़प रहे हैं। सिपाहियों ने गाड़ी रोकी और थाने के साथ एंबुलेंस को फोन किया। कुछ ही देर में एबुलेंस पहुंच गई।
मौके पर सबसे पहले पहुंचे सिपाही देवेश चौधरी और होमगार्ड निरंजन ने बताया कि हाईवे पर जब गाड़ी को देखा तो तत्काल उतरे और घायलों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। थाने से गाड़ी आई और चार एंबुलेंस आईं तब घायल अस्पताल पहुंचे। देवेश ने बताया कि थाने फोन किया तो पुलिस बल भी आ गया। दो पीआरबी भी आईं। घायलों को निकाल रहे थे लेकिन दो घायल ऐसे थे, जिन्हें एक घंटे में तब निकाला जा सका जब क्रेन आई। गाड़ी पीछे खिंचवाई, क्योंकि उनके पैर डेस्क बोर्ड और पेड़ के बीच में फंसे थे। घायलों को निकलवाने में सबसे पहले उनके साथ मैजिक वाहन का चालक महबूब भी मददगार रहा। लेकिन कुछ ही देर में थाने से कई पुलिसकर्मी पहुंच गए थे।
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