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हिमालय की तलहटी की देहवा और कटना नदी की संवरेगी सूरत

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पीलीभीत। हिमालय की तलहटी में बसे पीलीभीत को नदियों की जननी भी कहा जाता है। लखनऊ की शान गोमती का उद्गम यहीं से हुआ हैं। अवैध खनन, अतिक्रमण और प्रदूषण से मैली हो चुकी देहवा और कटना नदी की सूरत अब बदलेगी और अवरिल धारा बहेगी। शासन की ओर से जारी नदियों की पुनरुद्धार योजना में जिले की इन दोनों नदियों को शामिल किया गया है। इसके बाद प्रशासन कार्ययोजना तैयार करने में जुट गया है। बजट मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
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पीलीभीत से शाहजहांपुर और हरदोई तक 195.9 किलोमीटर तक देहवा नदी और पीलीभीत से शाहजहांपुर तक 35.8567 किलोमीटर तक कटना नदी पर कार्य होगा। कटना नदी बीसलपुर, बिलसंडा से होकर गुजरती है। विलुप्त होती प्रदेश की 50 नदियों को संवारने के लिए ग्राम विकास आयुक्त वीरेंद्र कुमार सिंह ने आदेश जारी किया। इसमें जिले की देहवा और कटना नदी को भी शामिल किया गया है। इसमें मनरेगा के तहत इसके कार्य कराए जाएंगे। इनको रिमोट सेंसिंग पर लेकर जीआईएस के जरिये चिन्हिकरण किया जाएगा। इनका प्रवाह बढ़ाया जाएगा। नदियों के दोनों तरफ पक्के निर्माण हटाए जाएंगे।
प्रदूषण और अवैध खनन रोकना सबसे बड़ी चुनौती
बीसलपुर क्षेत्र में कटना नदी से सबसे ज्यादा अवैध खनन होता है। इसके अलावा प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। देहवा नदी की बात करें तो शहर की गंदगी नालों से होकर इस नदी में पहुंचती है। कई जगहों पर तो इन नदियों का वजूद ही खतरे में आ गया है। दोनों नदियों का आंचल सिकुड़ता जा रहा है। उम्मीद है कि अब इन नदियों को फिर से एक नया जीवन मिल सकेगा।
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जिले की दो नदियां देहवा और कटना नदी के पुनरुद्धार किया जाएगा। शासन ने दोनों नदियों को पुनरुद्धार योजना में शामिल किया है। कार्य योजना तैयार करा रहे हैं। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जहां अवैध खनन हो रहा है वहां टीमें भेजकर दिखवाएंगे। खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- पुलकित खरे, डीएम
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