पीलीभीत। एक तरफ सरकार आयुष्मान योजना के पात्र लाभार्थियों को शत प्रतिशत लाभ देने में जुटी है। वहीं जनपद में सिस्टम की बेपरवाही लाभार्थियों को आयुष्मान योजना से वंचित रखने का काम कर रही है। नतीजतन शासन से आए हजारों लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड सीएमओ कार्यालय के पुराने भवन में कबाड़ के बीच रखे धूल फांक रहे हैं। इसकी कोई सुध लेने वाला भी नहीं है।
गरीबों को इलाज कराने में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए प्रधानमंत्री ने आयुष्मान योजना की शुरूआत की थी। इसके तहत पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलेगा। जनपद में 2011 की जनगणना के आधार पर आयुष्मान योजना के लिए 1.73 लाख परिवारों को चिह्नित किया गया। इन परिवारों के 8.46 लाख लाभार्थी चिह्नित किए गए थे। शुरुआत में सभी लाभार्थियों के कार्ड विभाग को मुहैय्या कराए गए थे, मगर स्वास्थ्य विभाग ने शासन से आए गोल्डन कार्ड लाभार्थियों को देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। खास बात यह है कि इनके रखरखाव को लेकर भी लापरवाह रवैया अपनाया गया।
अभी तक सीएमओ कार्यालय जिला अस्पताल परिसर में ही एक भवन में संचालित हो रहा था। नवंबर में इसे चौक बाजार के पास नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया था। इसके बाद से पुराने भवन के एक हिस्से में कंट्रोल रूम और दूसरे में सिर्फ कबाड़ रखा गया है। शासन से भेजे गए इन हजारों गोल्डन कार्ड को भी कबाड़ के साथ ही रख दिया गया। वहां उनकी न कोई देखरेख है, न ही बांटे गए। वह कबाड़ के बीच धूल फांक रहे हैं। गत्ते की एक पेटी में इन्हें डाल दिया गया है।
ये भी रखा गया था विकल्प
गोल्डन कार्ड लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा लाभार्थी जनसुविधा केंद्र से भी 30 रुपये का शुल्क देकर अपना कार्ड बनवा सकते थे। इस प्रक्रिया के तहत अभी तक सिर्फ 1.47 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बने हैं। 6.99 लाख लाभार्थी को अभी तक कार्ड जारी नहीं हो सके हैं। शासन ने इसकी समीक्षा की तो सीएमओ को जल्द लाभार्थियों के कार्ड बनवाने के निर्देेश दिए थे।
धूल फांक रहे कार्ड ग्रामीण इलाकों के
पुराने सीएमओ दफ्तर के भवन में धूल फांक रहे गोल्डन कार्ड ग्रामीण इलाकों के लाभार्थियों के हैं। अधिकतर कार्ड कलीनगर और बिलसंडा के हैं। इसके अलावा शहरी क्षेत्र के लाभार्थियों के भी कार्ड शामिल हैं। कई लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें पता ही नहीं है कि सरकारी विभाग के अलावा जनसुविधा केंद्र से भी कार्ड बनवा सकते हैं। अभी तक लाभार्थी गोल्डन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।
कोई आए तो भी नहीं देते कार्ड
अगर कोई लाभार्थी कार्ड के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास पहुंचता है तो भी गंभीरता नहीं दिखाई जाती। स्वास्थ्य विभाग के अफसर, कर्मचारी जनसुविधा केंद्र से बनवाने का रास्ता दिखा देते हैं, मगर सरकार की ओर से भेज गए निशुल्क कार्ड का टीम लगाकर वितरण करना जरूरी नहीं समझा जाता।
शासन ने लिया संज्ञान तो लगाए थे शिविर
आयुष्मान योजना को लेकर बीते दिनों शासन ने संज्ञान लिया तो खलबली मच गई थी। लाभार्थियों के कार्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने 15 दिसंबर से शिविर लगाए थे। इसी में लोगों के कार्ड बनवाना शुरू कर दिए थे। 16 दिनों में 15615 लोगों के कार्ड बनाए गए। सर्वे में 600 परिवार के कार्ड निरस्त हो गए। प्रत्येक कार्ड में लाभार्थियों को दस रुपये शुल्क देना पड़ा। जो वर्तमान में अपने पते पर मौजूद नहीं थे।
लापरवाही छिपाई, मगर वाहवाही खूब लुटी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आयुष्मान योजना को लेकर शुरूआत से ही लापरवाही छिपाने का काम किया। मगर वाहवाही लूटने से पीछे नहीं हटे। आयुष्मान योजना के कार्ड बनाने के अभियान में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगाकर 16 दिन में 15615 लाभार्थियों के कार्ड बनाए थे। शासन से की जा रही मानीटरिंग में मंडल में प्रथम और प्रदेश में आठवां स्थान मिला तो खूब वाहवाही लूटी थी।
पूर्व में आए कार्ड का वितरण क्यों नहीं हुआ। इसे लेकर नोडल से जानकारी कराएंगे। शासन के निर्देेश पर चलाए जा रहे शिविर में सर्वाधिक कार्ड बनाए हैं। जनपद मंडल में प्रथम और प्रदेश में आठवें स्थान पर रहा है। शत प्रतिशत लाभार्थियों के कार्ड बनाए जाएंगे। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ