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UP: पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 11 बाघों की कहानी, जिन्हें मिला कारावास; 'केसरी' की दहाड़ से थर्राता था जंगल

Tue, 06 Jan 2026 06:51 PM IST
मुकेश कुमार जितेंद्र अवस्थी, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर आकर इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाले 11 बाघ आज भी कारावास की सजा भुगत रहे हैं। ये बाघ यूपी के अलग-अलग चिड़ियाघरों में बंद हैं। जंगल से बगावत करने वाले इन बाघों के लिए चिड़ियाघर में रहना किसी सजा से कम नहीं है। 
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जंगल में विचरण करते बाघ - फोटो : पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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विस्तार
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बाघों को मिला कारावास....यह शब्द सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन सच यही है। जंगल के नियमों से बगावत कर आबादी में उत्पात मचाने वाले बाघों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर भेजा जाना ही उनके लिए कारावास है। खुले में विचरण और अपनी सत्ता चलाने वाले बाघ चिड़ियाघर की चहारदीवारी में कैद हो जाते हैं। यह बंधन रास न आने पर एक बाघ की मौत भी हो चुकी है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के 11 बाघों को कारावास की सजा मिल चुकी है। 12 बाघ ऐसे भी हैं, जिन्हें जंगल वापस आने का मौका मिला है।

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पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर्यटन और बाघ के लिए देश दुनिया में सुर्खियां बटोर रहा है। यहां आने वाले सैलानियों को बाघ के दीदार हो ही जाते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 72 बताई जा रही है। वैसे तो यहां के बाघ काफी शांत रहते हैं। कभी-कभार कुछ बाघ जंगल के नियम तोड़कर आबादी में पहुंच जाते हैं। इंसानों को नुकसान पहुंचा देते हैं। इसी वजह से यहां कई बाघों को रेस्क्यू करने के बाद चिड़ियाघर भेजकर उम्रकैद की मिल चुकी है। 

11 वर्षों में 26 रेस्क्यू, 11 बाघों को भेजा गया चिड़ियाघर 
पीटीआर के आंकड़ों के मुताबिक टाइगर रिजर्व बनने के बाद वर्ष 2014 से अब तक करीब 26 रेस्क्यू ऑपरेशन किए गए। इसमें पांच शावकों समेत 23 बाघ-बाघिन को पकड़ा गया। छह तेंदुआ भी रेस्क्यू किए जा चुके हैं। इनमें से 12 बाघ को तो वापस जंगल आने का मौका मिला। 11 बाघों को कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर के चिड़ियाघर भेजा गया है। 

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पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : संवाद
केसरी की दहाड़ से थर्राता था जंगल
सितंबर 2024 में माला रेंज की भैरों बीट से बेहोश कर पकड़ा गया केसरी भी इन्हीं में से एक था। पीटीआर के अफसर भी उसकी भारी-भरकम कद-काठी के मुरीद थे। नौ सितंबर को जंगल सीमा से सटे बांसखेड़ा गांव निवासी मजदूर केदारी की बाघ के हमले में मौत होने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और लोगों के आक्रोश को देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने विभागीय अनुमति के बाद बाघ को पकड़ने के प्रयास शुरू किए। 

23 सितंबर को तड़के भैरों बीट के जंगल में बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया था। बाघ को दो-तीन दिन पीटीआर मुख्यालय पर पिंजरे में रखा गया। विभाग की अनुमति के बाद बाघ को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। वहां भी बाघ आकर्षण का केंद्र था। पूर्व में चिड़ियाघर के निरीक्षण के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे केसरी नाम दिया था।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ - फोटो : PTR
सलाखों के पीछे केसरी ने तोड़ा था दम
वर्ष 2024 में मथना के पास से रेस्क्यू किए गए बाघ केसरी को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। जहां उसकी तबियत बिगड़ गई। कुछ दिन उपचार के बाद केसरी ने दम तोड़ दिया था।पिछले साल कानपुर के चिड़ियाघर भेजा गया बाघ वहां लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। इसे बघीरा नाम दिया गया है।

चर्चाओं में रहा था चंदू का किस्सा 
पीटीआर का एक अन्य बाघ भी वर्ष 2018 में सुर्खियों में रहा था। पांच मार्च को माधोटांडा क्षेत्र के चांदपुर गांव में महिला को मारने के बाद घेराबंदी कर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया था। बाघ की कद-काठी देख रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसर और कर्मचारी दंग रह गए थे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बाघ को बेहोश करने में सफलता मिली थी।
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