पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ
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सलाखों के पीछे केसरी ने तोड़ा था दम
वर्ष 2024 में मथना के पास से रेस्क्यू किए गए बाघ केसरी को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। जहां उसकी तबियत बिगड़ गई। कुछ दिन उपचार के बाद केसरी ने दम तोड़ दिया था।पिछले साल कानपुर के चिड़ियाघर भेजा गया बाघ वहां लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। इसे बघीरा नाम दिया गया है।
चर्चाओं में रहा था चंदू का किस्सा
पीटीआर का एक अन्य बाघ भी वर्ष 2018 में सुर्खियों में रहा था। पांच मार्च को माधोटांडा क्षेत्र के चांदपुर गांव में महिला को मारने के बाद घेराबंदी कर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया था। बाघ की कद-काठी देख रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसर और कर्मचारी दंग रह गए थे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बाघ को बेहोश करने में सफलता मिली थी।