खेतों से अधिक उत्पादन लेने के लिए किसान बड़ी मात्रा में नमक का प्रयोग कर रहे हैं। इसका सर्वाधिक प्रयोग धान की खेती में किया जा रहा है। नमक के लगातार प्रयोग से जमीन की उत्पादकता प्रभावित हो रही है और धीरे धीरे वह बंजर बन रही है। इसके बाद भी कृषि विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। अधिकारियों की उपेक्षा के चलते ही मंडी समिति के बाहर खुले आम साबुत नमक बिक रहा है।
जिले में कई किसान दूसरे किसानों की जमीन ठेके पर लेकर खेती करते हैं। ठेके पर ली गई इस जमीन से कम लागत लगाकर अधिक उत्पादन लेने के लिए खाद दवा के स्थान पर साबित नमक का प्रयोग किया जा रहा है। दरअसल खेत में नमक डालने से जमीन में मौजूद सूक्ष्म खनिज तत्व जैसे मैगनीज, बोरान आदि की उपलब्धता बढ़ जाती है जिसका तत्कालिक लाभ फसल पर दिखाई देता है। लेकिन खेतों में नमक का लगातार और लंबे समय तक प्रयोग होने से जमीन बंजर होने लगती है। दरअसल नमक एक प्रकार का खनिज है जिसे रसायन विज्ञान की भाषा में सोडियम क्लोराइड (एनएसीएल) कहते हैं। यह सोडियम क्लोराइड खेत में मौजूद अन्य तत्वों से मिलने के बाद उनके गुण बदल देता है साथ ही खेत में सल्फर की मात्रा काफी अधिक हो जाती है जो जमीन के लिए नुकसान दायक है। खेतों में नमक के बढ़ते प्रयोग के चलते ही इसकी बिक्री भी बढ़ रही है और यही कारण है कि मंडी समिति के बाहर की दुकानों सहित शहर एवं जिले के अन्य कस्बों में साबित नमक की बोरियों का बफर स्टाक है।
सबसे ज्यादा धान में होता है प्रयोग
खेतों में नमक का प्रयोग यूं तो धान गेहूं दोनों फसलों में होता है लेकिन गेहूं की अपेक्षा धान में इसके प्रयोग का प्रचलन बढ़ रहा है। चूंकि गेहूं की अपेक्षा धान को अधिक खाद पानी और खनिज तत्वों की जरूरत होती है इसलिए किसान धान की फसल में काफी मात्रा साबुत नमक खेतों में डालते हैं।
खतरनाक है खेतों में नमक का प्रयोग
खेतों में नमक का प्रयोग करना खतरनाक है। प्रारंभ में भले ही किसानों को इसका लाभ दिखता हो लेकिन नमक के प्रयोग से जमीन की उत्पादकता घट जाती है जिससे वह बंजर हो जाती है। कृषि गोष्ठियों में किसानों से इसकी लगातार अपील भी की जाती है।
डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक, केवीके