हाथ से ही पपड़ी की तरह उखड़ गई थी सड़क
करीब एक करोड़ की लागत से बनी चंदुइया-मनहरिया मार्ग सड़क के हाथ से ही पपड़ी की तरह उखाड़ने का वीडियो दो माह पूर्व सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। निर्माण में मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगा। इस पर तत्कालीन डीएम संजय कुमार सिंह ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही मरम्मत करा दी गई थी।
घुंघचाई क्षेत्र के चंदुइया-मनहरिया संपर्क मार्ग का निर्माण इसी वर्ष पूरा हुआ। पिछले वर्ष जब सड़क का निर्माण शुरू हुआ, तभी ग्रामीणों ने मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया था। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिला पंचायत के जेई और एई मनमाने तरीके से काम कराते रहे। दो माह बाद ही यह क्षतिग्रस्त हो गई। मई में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें कुछ ग्रामीण सड़क को हाथ से पपड़ी की तरह उखाड़ते नजर आए थे।
यह भी पढ़ें- Bareilly News: शीशे का गेट तोड़ रमाडा होटल में घुसी कार, समझौते के बाद हादसे का फुटेज वायरल
उस समय जिला पंचायत की ओर से अलग-अलग तर्क देकर मामले को टरका दिया गया। हालांकि तत्कालीन डीएम ने मामले का संज्ञान लिया और एएमए से स्पष्टीकरण मांगा था। तब जिला पंचायत ने सड़क की मरम्मत उसी ठेकेदार से कराने की बात कही थी। अब सोमवार को शासन से कार्रवाई हुई तो जिला पंचायत में खलबली मच गई।
जांच में पीसी एवं सीलकोट का अधोमानक मिला कार्य
जांच में चंदुइया-मनहरिया मार्ग के निर्माण में मानकों की अनदेखी मिली। पीसी एवं सीलकोट का कार्य भी अधोमानक मिला। विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी ने ठेकेदार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष और जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा गया है।
जिपं अध्यक्ष के खिलाफ भेजा था शिकायतों का चिट्ठा
पूरनपुर ब्लॉक क्षेत्र में मनहरिया-चंदुइया मार्ग की सड़क उधड़ने का मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत के बारे में काफी शिकायतों का चिट्ठा शासन को भेजा गया था। इसमें खासतौर से जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. दलजीत कौर को निशाना बनाया गया था।
शिकायत पत्र में आरोप था कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने निजी कॉलेज में सरकार के लगभग 18 लाख रुपये से आरसीसी रोड बनवा ली, जबकि आम जनता टूटी-फूटी सड़कों पर चलने को मजबूर है। ग्रामीण इलाकों की उपेक्षा कर निजी संपत्ति के लिए सरकारी धन का उपयोग खुलेआम किया गया है। इतना ही नहीं, अध्यक्ष ने अपने निजी कृषि फार्म के लिए भी लगभग 27 लाख के सरकारी बजट से नाले का निर्माण करवाया।
यह भी पढ़ें- UP News: बरेली में ड्रोन की दहशत... कस्तूरबा स्कूल में मचा चोर का शोर, पुलिस पहुंची तो सामने आई ये बात
यह भी आरोप है कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पति के भाई की निजी गाड़ी को नियमों को दरकिनार कर ‘ऑफिस अटैच’ दिखाकर 70 हजार प्रति महीने भुगतान कराया। इस तरह से लगभग 24 लाख रुपये का भुगतान किया गया। कर दिया। सरकारी दस्तावेजों में इसे पंचायत की गाड़ी के रूप में दिखाया गया, सूत्रों की माने तो यह वाहन निजी उपयोग में ज्यादा रहती है ।