पूरनपुर। भाकियू चढूनी के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढूनी के लखीमपुर जाने की सूचना पर पुलिस ने मंगलवार रात को असम हाईवे पर बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया। पूरी रात अफसर चढ़ूनी को रोकने को उनके मोबाइल की लोकेशन लेते रहे। पचपेड़ा गढ़ा अफसरों को मोबाइल की लोकेशन मिली। इस दौरान जराकोठी में चढ़ूनी गुट के हरियाणा से लखीमपुर जा रहे सात किसानों को पुलिस के आधी रात को हिरासत में ले लिया। विरोध में एक धार्मिक स्थल में एकत्र हुए किसानों ने पंचायत कर रोष व्यक्त किया। इस दौरान हिरासत में लिए सातों किसानों को पुलिस ने किसान नेताओं की सुपुर्दगी में दे दिया। जो धार्मिक स्थल में चल रही बैठक में पहुंचे। बाद में हरियाणा के सातों किसान क्षेत्र के कुछ किसानों के साथ लखीमपुर को रवाना हो गए।
लखीमपुर की घटना को लेकर भाकियू चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी के रात को असम हाईवे से लखीमपुर को जाने की सूचना पर पुलिस ने असम हाईवे पर जराकोठी के समीप बैरिकेडिंग कर हाईवे को बंद कर दिया। पीलीभीत शहर के पास से भी वाहनों को रोका गया। पूरी रात अफसर चढ़ूनी की मोबाइल की लोकेशन जानते रहे। आधी रात तक उनके मोबाइल की लोकेशन पचपेड़ा तक मिली। इस दौरान मंगलवार रात करीब डेढ़ बजे जराकोठी पुलिस चौकी के समीप पहुंची हरियाणा के दो वाहनों को पुलिस ने रोक लिया। वाहनों में सवार चढ़ूनी गुट के किसान हरियाणा के सिरसा निवासी तरसेम सिंह, अंबाला के रसूलपुर निवासी सिमरन, चरखी दादरी निवासी सुधीर, सोनीपत के खरखौदा निवासी रविंद्र कुमार, बहादुरगंज निवासी संजय, दादुरी के दीपक सहगल और पंजाब के सिमराणा निवासी गौरव को हिरासत में ले लिया। शोर मचा कि दूसरी एक कार में चल रहे गुरुनाम सिंह चढ़ूनी योजना के तहत कुछ दूर पैदल चलकर दूसरी कार से लखीमपुर की ओर चले गए। हालांकि भाकियू के चढ़ूनी जिलाध्यक्ष जसविंदर सिंह ने बताया कि चढ़ूनी जिले में आए तो थे। मगर कहां चले गए। इसकी जानकारी नहीं हो सकी। चढूनी गुट के किसानों को हिरासत में लेने की जानकारी पर गोमती गुरुद्वारा में एकत्र हुए किसानों ने पंचायत कर रोष व्यक्त किया। किसानों के शीघ्र रिहा न होने पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाने लगी। हालांकि इस दौरान पुलिस लाइन पहुंचे किसान नेता मनप्रीत सिंह आदि को हिरासत में लिए गए सातों किसानों को सुपुर्दगी में दे दिया गया। सातों किसान धार्मिक स्थल में चल रही पंचायत में पहुंचे। किसानों की मर्जी के मुताबिक क्षेत्र के कुछ किसान उन सातों किसानों के साथ लखीमपुर की ओर रवाना हो गए। किसानों की टीम में शामिल किसान नेता वीएम सिंह समर्थक गुरुप्रीत सिंह ने बताया कि उन लोगों को मैलानी में लखीमपुर जाने से रोक लिया गया।
लखीमपुर की घटना दुखद और निंदनीय है। घटना के बाद अगर कोई शोक संवेदना व्यक्त करने घटना में मारे गए किसानों के घर जाना चाहता है। तब प्रशासन उनको क्यों रोकता है। दुख की घड़ी में किसी के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त करना क्या अपराध है।
काबुल सिंह, पूरनपुर
जब किसान तीन कानून नहीं चाहते। तब उनके ऊपर जबरिया कानून क्यों थोपे जा रहे है। शांतिपूर्वक ढंग से इसका विरोध करने पर किसानों को रोका जा रहा है। लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार सबको है। सरकार को तीनों कानून वापस करना चाहिए। कानून वापस न होने पर मजबूरन किसान धरना, प्रदर्शन कर रहे है।
जसविंदर सिंह, अमरिया, अध्यक्ष भाकियू चढूनी
लखीमपुर की घटना की सब निंदा कर रहे हैं। सरकार ने भी कुछ मांगे मान ली। मगर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। घटना में मारे गए किसानों के परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा है। इससे किसान आक्रोशित है।
- जोगेंद्र सिंह, अमृतपुर
नेता शोक संवेदना व्यक्त करने को किसानों के घर जा रहे है उनको तो रोका जा रहा है। मगर जो हत्यारोपी पर उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। लोगों को न्याय के प्रति आवाज उठाने को रोका जा रहा है। इसे बर्दास्त नहीं किया जा सकता। इसको लेकर किसानों में रोष है।
- कर्म सिंह, बसंतपुर नौनेर
गुरुनाम सिंह चढ़ूनी के जिले से निकलने की सूचना पर रात को सतर्कता बरती गई। उनके मोबाइल की लोकेशन क्षेत्र के पचपेड़ा गढ़ा तक मिली। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। हिरासत में लिए गए हरियाणा के उनके साथियों ने बताया कि चढ़ूनी पैदल लखीमपुर की ओर निकले हैं।
- रामस्वरूप, एसडीएम