उन्होंने बताया कि माधोटांडा-खटीमा जंगल मार्ग पर लालपुल से दो किलोमीटर पहले अचानक जंगल से निकला बाघ उनपर झपट पड़ा। बाइकें अंसतुलित हो कर गिर गईं। बाघ का पंजा लगने से उनके बेटे अनूप के हाथ और पीठ में घाव हो गए। प्रभुदयाल व राधेश्याम के भी पंजे लगने से गहरे जख्म हुए। बाघ के हमले के बाद वे सब दहशत और डर में थे। बाघ सामने ही था लेकिन कुछ ही देर में गांव के कुछ मजूदर इसी मार्ग से गुजरे।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने सबको सड़क पर पड़े देखा और सामने बाघ देखा तो उनकी भी चीख निकल गई, लेकिन उन्होंने शोर मचाया। शोर-शराबा होने के बाद बाघ जंगल की ओर निकल गया और जान बच गई। इन लोगों ने घायलों को बाइकों से पहले जंगल पार कराया। गांव में सूचना दी और एबुलेंस बुलाई। माधोडांटा सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद तीनों घायलों को पूरनपुर के लिए रेफर किया गया।
वन विभाग के दावे हो रहे हवाई, बिगड़ने लगे हालात
वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन जीव संघर्ष को रोकने के लिए भले ही टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए जा रहे हों लेकिन धरातल पर लापरवाही हावी है। न तो झुंड के रूप में जंगल में प्रवेश के निर्देशों पर अमल किया गया और न ही वाहनों की गति धीमी हो सकी। इससे बाघों के साथ इंसानों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है। नतीजा यह है कि एक माह पूर्व माधोटांडा पीलीभीत मार्ग पर रिछौला के निकट वाहन की चपेट में आने से तेंदुए की मौत हो गई थी। इधर बुधवार को जंगल मार्ग पर बाघ के हमले में बाइक सवार तीन मजदूर घायल हो गए।
दरअसल जंगल क्षेत्र में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जंगल क्षेत्र के अलावा बाहरी इलाकों में बाघों की मौजूदगी भी बढ़ रही है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के लिए शुभ संकेत तो है लेकिन बाघों की सुरक्षा के साथ मानव वन्य जीव संघर्ष के हालातों को ध्यान में रखते हुए काम किए जाने की जरूरत है। वजह यह है कि माधोटांडा पीलीभीत जंगल मार्ग के अलावा खटीमा-पूरनपुर जंगल मार्ग पर पिछले कई दिनों से बाघों की सक्रियता बढ़ रही है। मार्ग पर चहलकमी करते बाघों के कई वीडियो भी वायरल हो चुके हैं। ऐसे में विचरण कर रहे बाघों को सुरक्षित रखने के साथ ही जंगल मार्ग से गुजरने वाले बाइक सवार राहगीरों की सुरक्षा भी टाइगर रिजर्व प्रशासन के लिए चुनौती बन रहा है।