पीलीभीत। दिव्यांगता प्रमाण पत्र की आस में इधर से उधर दौड़ते दिव्यांगों का दर्द जिला दिव्यांगजन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का नजर नहीं आता। सोमवार को लगे शिविर में आए चिकित्सक अगले सप्ताह आना, दो हफ्ते बाद आना कहकर दिव्यांगों को चक्कर लगवाते दिखे। दूसरों पर आश्रित दिव्यांगों काे भी दौड़ाने में भी उन्हें तरस नहीं आया।
मंगलवार को दिव्यांगजन दिवस है। विभाग और अन्य अफसर कई स्थानों पर कार्यक्रम कर दिव्यांगों के लिए संचालित योजनाएं गिनाएंगे। बड़े-बड़े दावे किए जाएंगे, लेकिन दिव्यांग प्रमाण पत्र की आस में भटकते दिव्यांगों के दर्द को जानने का प्रयास नहीं होगा।
सोमवार काे जिला अस्पताल परिसर में लगे दिव्यांगता प्रमाण पत्र शिविर में आए दिव्यांगों की उपेक्षा देखने लायक थी। कोई घिसटकर आया तो किसी को परिजन गोद में उठा कर लाए।
बैठने की जगह नहीं थी। कई दिव्यांग सड़क और कार्यालय के सामने फर्श पर बैठे ही रहे। दोपहर 12:30 बजे सिर्फ अस्थि रोग विशेषज्ञ ही आए थे। अन्य कोई भी चिकित्सक शिविर में नहीं पहुंचा था।
काफी देर इंतजार, अब कह रहे कमरा नंबर 60 में जाओ
दिव्यांग राजकुमारी न खड़ी हो सकती और न ही बैठ सकती हैं। परिजन उसे गोद में लेकर पहुंचे थे। काफी देर तक इंतजार किया। बाद में चिकित्सक ने उसे कमरा नंबर 60 में जाने के लिए कहकर टरका दिया। परिजनों ने बताया कि पुराना प्रमाण पत्र भी नहीं देखा। पता नहीं क्यों दूसरी जगह भेज दिया। पैर से दिव्यांग मो. फहीम भी काफी देर से चक्कर लगा रहे थे। किसी ने सही जवाब नहीं दिया।
दो सप्ताह से दौड़ रहे, अब कहा-अगले सोमवार आओ
बीसलपुर से आए चंदन के हाथ में दिक्कत है। काफी देर लाइन में लगने के बाद चिकित्सक के पास पहुंचे तो अगले सोमवार को आने की बात कहकर चलता कर दिया। चंदन और साथ आए परिजनों ने बताया कि दो सप्ताह से दौड़ रहे हैं। ऑनलाइन फार्म भरे कई महीने हो गए हैं। गांव पैंतबोझी निवासी संजीव का कहना था कि वह एक वर्ष से दौड़ रहे हैं। प्रमाण पत्र अब तक नहीं बना।
कई दिव्यांगों की सुनवाई तक नहीं
प्रमाण पत्र के लिए शमीम बेगम को उनके परिजन चादर में बिठाकर डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। बताया कि फार्म तो जमा हो गया, लेकिन कुछ कहा नहीं। पैरों से दिव्यांग लिलहर मुड़िया निवासी संगीता भी प्रमाण पत्र की आस में भटक रही थीं। गंगाराम और कई अन्य दिव्यांग भी परेशान थे। इनकी कोई सुनने वाला भी नहीं था।
सीएमओ से शिकायत, नतीजा सिफर
काफी परेशान होकर चंदन गुप्ता के तीमारदार ने सीएमओ को फोन कर शिकायत की। कहा गया कि कुछ देर रुको अभी प्रमाण पत्र बनेगा, लेकिन सुनवाई कोई नहीं हुई। दिव्यांगता प्रमाण पत्र शिविर में 200 से अधिक दिव्यांग पहुंचे, लेकिन चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों ने मनमाने तरीके से कई दिव्यांगों को चलता कर दिया।
ये भी जानें
- 20300 के करीब दिव्यांगों को पेंशन मिलती है।
- 19816 दिव्यांगों का यूडीआईडी कार्ड बना है।
- दिव्यांगता प्रमाण पत्र शिविर प्रत्येक सप्ताह होता है।
- अस्थि रोग, नाक-कान व गला राेग के अलावा नेत्र विशेषज्ञ को आना होता है।
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जिले में अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं थे, बरेली से बुलाया गया। ईएनटी जिला अस्पताल में एक हैं और नेत्र विशेषज्ञ भी कम हैं। दिव्यांगों को दो-तीन बार क्यों दौड़ाया गया, इसकी जांच कराएंगे।
- आलोक कुमार शर्मा, सीएमओ
पर्याप्त जगह न होने की वजह से जमीन पर बैठकर इंतजार करते दिव्यांग संवाद
पर्याप्त जगह न होने की वजह से जमीन पर बैठकर इंतजार करते दिव्यांग संवाद
पर्याप्त जगह न होने की वजह से जमीन पर बैठकर इंतजार करते दिव्यांग संवाद
पर्याप्त जगह न होने की वजह से जमीन पर बैठकर इंतजार करते दिव्यांग संवाद