पूरनपुर। खेत में जाने के विवाद में ग्रामीण ने पुत्रों के साथ मिलकर अपने 55 वर्षीय दिव्यांग भाई प्रेमराज को पीटकर मार डाला। इस दौरान बचाव में आया भतीजा पिटाई से घायल हो गया। पुलिस ने पिता और उसके तीन पुत्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पिता और एक पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि दो फरार हैं।
घटना गांव कबीरपुर कसगंजा में रविवार सुबह करीब साढ़े छह बजे हुई। गांव निवासी प्रेमराज के पुत्र मुनीश कुमार ने बताया कि उसके चाचा बाबूराम ने गांव निवासी ओमप्रकाश दीक्षित के खेत को बटाई पर ले रखा है। उनके घर में शौचालय न होने पर शनिवार शाम को उनकी मां निर्मला देवी ओमप्रकाश के खेत में गई थीं। इसकी जानकारी लगने पर चाचा बाबूराम ने अपने पुत्र राजीव, राजेश, रामऔतार के साथ मिलकर उसकी मां से गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। रविवार सुबह साढ़े छह बजे वे लोग फिर मां को देखते ही गालियां देने लगे। इसका विरोध करने पर लाठी, डंडे लेकर घर में घुसकर परिवार के लोगों की पिटाई शुरू कर दी। घायल पिता को इलाज के लिए सीएचसी पूरनपुर लाख। चिकित्सकों ने गंभीर हालत पर पिता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने हालत गंभीर होने की जानकारी दी। तब पीलीभीत शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुनीश पिता के शव को घर ले गया। सूचना पर सीओ वीरेंद्र विक्रम, कोतवाल हरीशवर्धन सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सीओ ने पीड़ित परिवार वालों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि मुनीश की ओर से बाबूराम, उसके पुत्र राजीव, राजेश, रामऔतार पर घर में घुसकर गाली-गलौज कर मारपीट करने धमकाने और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। बाबूराम और राजीव को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि राजेश और रामऔतार फरार हैं।
हाथ की अंगुलियां कटने पर दिव्यांग हो गया था प्रेमराज
मुनीश ने बताया कि कई साल पहले थ्रेशर से गेहूं निकालते समय पिता के एक हाथ की दो अंगुलियां कट गई थी। पिता खेती के अलावा परिवार का पालन पोषण को फेरी लगाकर गुब्बारों की बिक्री भी करते थे।
अक्सर मामूली बातों पर हो जाता था दोनों परिवारों में विवाद
प्रेमराज और बाबूराम के परिवारों में मामूली बातों को लेकर अक्सर विवाद हो जाता था। पति की हत्या के बाद पत्नी निर्मला बार-बार यही कर रही थी। बताया कि कई दिनों से जान से मारने की धमकी भी आरोपी दे रहे थे।
प्रेमराज सात भाइयों में लेखराज से छोटा था। प्रेमराज, बाबूराम, राजाराम, रामचंद्र, सत्यपाल के परिवार अलग-अलग घरों में पास-पास रहते हैं। जबकि लेखराज का घर गांव में ही कुछ दूरी पर है। लेखराज की करीब पांच महीने पहले और रामरतन की कई साल पहले मौत हो चुकी है। प्रेमराज का घर लिंटरपोश जबकि बाबूराम का घर टिनशेड है। प्रेमराज के परिवार के सदस्यों के छत पर चढ़ने पर अक्सर विवाद हो जाता था। बाबूराम के परिवार वाले छत चढ़कर उसके घर की ओर देखने का आरोप लगाते हुए झगड़ा करने के लिए आमादा हो जाते थे। निर्मला ने बताया कि विवाद पर अक्सर आरोपी मार डालने की धमकी देते थे। रविवार को तो उसके पति को मार डाला। पति के हत्यारों को सजा दिलाकर ही रहूंगी।