पूरनपुर। सीएचसी में तैनात एक कर्मचारी पर शारीरिक शोषण और लव जिहाद करने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। इस पर फिर से जांच शुरू हो गई। मंगलवार को एडीएम और डीडीओ ने सीएचसी पहुंचकर बंद कमरे में कई आशा वर्कर, एएनएम व संगिनियों के बयान लिए। पहले भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जांच की थी।
एक महिला कर्मचारी ने डीएम सहित अन्य उच्च अफसरों को मार्च में भेजे शिकायती पत्र में बताया था कि सीएचसी में तैनात एक कर्मचारी मनमाने ढंग से काम करता है। वह एक समुदाय की महिलाओं को प्रताड़ित कर उनका शारीरिक और मानसिक शोषण करता है। आरोपी कर्मचारी ने काम के बहाने शिकायतकर्ता को कई बार मोबाइल पर मेसेज भेजे। विरोध पर धमकाने और शोषण की बात कही थी। इससे पहले अमरिया में तैनाती के दौरान आरोपी कर्मचारी ने ऐसा घिनौना काम किया था। वहां उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज भी हुई थी। शिकायती पत्र में यह भी कहा गया था कि मामले की शिकायत करने सीएमओ ऑफिस पहुंचकर सीएमओ से मिली। सीएमओ ने फटकार लगाकर भगा दिया। मामला अखबार की सुर्खियां बनने पर सीएमओ ने मार्च में कर्मचारियों को अपने कार्यालय बुलाकर जांच की। मगर शोर मचा। मामला विभाग से जुड़ा होने और बदनामी आदि को लेकर जांच में लीपापोती कर दी गई। कहा गया कि शिकायती पत्र में शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं लिखा था। जांच में ऐसी कोई महिला कर्मचारी नहीं मिली। जिसने शोषण और लवजेहाद का आरोप लगाया हो। चूंकि महिला ने शिकायत को शासन स्तर के उच्च अफसरों को भी पत्र भेजा था। अब मामले में दोबारा जांच शुरू हो गई। मंगलवार को एडीएम देवेंद्र मिश्र और डीडीओ ने सीएचसी पहुंचकर बंद कमरे में एक-एक महिला कर्मचारी को बुलाकर बयान लिए। आशा कार्यकत्रियों, संगिनियों और कई एएनएम से जानकारी की गई। जांच के दौरान सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को भी दूर रखा गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेम सिंह राजपूत ने बताया कि मार्च माह में एक कर्मचारी पर लगे लवजेहाद आदि के मामले में अफसर जांच करने आए थे। कई आशा वर्करों, संगिनियों और एएनएम के बयान लिए गए है।