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गैर हिंदी भाषी राज्यों में जरूरत की भाषा बनती जा रही है हिंदी

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पीलीभीत। हिंदी ऐसी भाषा है जो देश में रहने वाले लोगों को भारतीयता का बोध कराती है। गैर हिंदी भाषी प्रदेशों में भी बहुत से लोग केवल हिंदी बोल रहे हैं। ऑफिस का काम कामकाज भी अधिक से अधिक हिंदी में कर रहे हैं। यही वजह है कि हिंदी की वैश्विक स्तर पर पहचान बनी है। हिंदी को बढ़ावा देने वालों को भी खुद नई पहचान मिल रही है। शिक्षाविदों का मानना है कि हिंदी अब जरूरत की भाषा बन गई है। हिंदी जैसी सशक्त भाषा कोई दूसरी नहीं है। इसलिए हिंदी को आगे बढ़ाएं।
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हिंदी जितनी सशक्त भाषा कोई और नहीं है। शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, प्रशासनिक आदि कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है। जहां हिंदी न बोली और लिखी जाए। देश के लगभग सभी भाग, यहां तक कि विदेशों में भी हिंदी बोली जा रही है। इसलिए हम सब भी हिंदी को आगे बढ़ाएं। - रमेश चंद्र, प्रवक्ता, ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज
हिंदी एक ऐसी भाषा के रूप में प्रचलित है, जो सभी प्रांत के लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है। गैर हिंदी भाषी प्रदेशों में भी हिंदी का प्रचलन बढ़ रहा है। हिंदी भारतीय होने का गर्व महसूस कराती है। इसलिए अपने बच्चों को बचपन से ही हिंदी के बारे में ज्ञान दें, ताकि वह अपनी संस्कृति को याद रख सके। - सपना गंगवार, शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय प्यास
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कोई भी भाषा तब शक्तिशाली होती है, जब तक उसके बोलने वाले लोग शक्तिशाली होते हैं। लेकिन बदलते युग में हम अपनी मातृभाषा को भूलते जा रहे है। जो गलत है। इसका सम्मान करें। ह से हिंदी और ह से है हमारा हिंदुस्तान। इसलिए गर्व से कहे हम हिंदी है। - द्रोपदी देवी, शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय पीलीभीत कोहना
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