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पटरी से उतरीं स्वास्थ्य सेवाएं, बीमारों को मिल रहा सिर्फ परामर्श

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बिलसंडा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टेक्नीशियन न होने से एक्सरे मशीन धूल चाट रही है। यही नहीं पैथालॉजी लैब भी बंद पड़ी है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को डॉक्टर केवल परामर्श दे रहे हैं। जांच के लिए उन्हें प्राइवेट में जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
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सीएचसी में हालत इतनी खराब है कि ब्लड ग्रुप तक की जांच नहीं हो पा रही है। अगर कोई बीमार है और जांच कराना जरूरी है तो उसे बाहर ही जाना पड़ेगा। कारण, अस्पताल में लैब टेक्नीशियन नहीं है। एक्सरे मशीन भी टेक्नीशियन न होने से बंद पड़ी है। ऐसे में मरीजों को या तो प्राइवेट लैब में रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं या फिर जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। चिकित्सा सेवाओं को ठीक करने के लिए डाक्टर और चिकित्साकर्मी चाहिए लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियों का दावा कर रहा है लेकिन बिलसंडा सीएचसी में लैब और एक्सरे टेक्नीशियन नहीं है। अस्पताल में चिकित्साधीक्षक समेत दो डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि चार पद स्वीकृत हैं।
अगस्त से नहीं है एक्सरे टेक्नीशियन
सीएससी में एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। पूर्व में मशीन चलाने के लिए एक टेक्नीशियन नियुक्त था, लेकिन अगस्त 2021 में स्थानांतरण होने के बाद अभी तक कोई नई नियुक्ति न होने के कारण एक्स-रे कक्ष पर ताला लगा हुआ है। एक्सरे मशीन न चलने पर लोगों को प्राइवेट में तीन सौ रुपये देने पड़ रहे हैं।
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इन गांवों के आते हैं मरीज
सीएचसी पर इलाज के लिए रौतापुर, घनश्यामपुर, बमरौली नगरिया, गहोनिया, चरखौला, सिमरा, भीकमपुर, शीतलपुर, जगतपुर, मरौरीखास, मलिका, पस्तौर, करेली, बिलसापुर, मुड़िया समेत कई गांव के लोग आते हैं।
एक्स-रे एवं लैब टेक्नीशियन के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जल्द दोनों पदों के लिए तैनाती कराई जाएगी। लैब को वैकल्पिक व्यवस्था के चलते संचालित कराया जा रहा है, अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं।
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- डॉ. श्रीराम सीएचसी अधीक्षक, बिलसंडा
सीएचसी बिलसंडा का बुरा हाल है। अगर किसी का फ्रैक्चर हो जाता है तो एक्सरे सीएचसी में नहीं होता है। प्राइवेट में धन खर्च होने के साथ जोखिम रहता है।
- कालीचरन, मदन मोहन कॉलोनी
बुधवार को अपनी पत्नी की जांच कराने अस्पताल आए थे, लेकिन टेक्नीशियन न होने से जांच नहीं हो पाई। प्राइवेट में जांच करानी पड़ी।
- राजेश जायसवाल, मदन मोहन कॉलोनी
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